धर्मशाला, 13 मार्च (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे से बाहर करने के निर्णय को ‘लोकतंत्र का काला अध्याय’ और ‘भ्रष्टाचार को सरकारी संरक्षण’ देने वाला कदम करार दिया है।

उन्होंने शुक्रवार को यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा कि प्रदेश के अधिकारी सूचना अधिनियम 2005 की धारा (24) 4 का ग़लत व्याख्यान कर रहे हैं जिसके अंतर्गत खुफिया व सुरक्षा तंत्र को ख़तरे का हवाला देकर संस्था को इससे बाहर करने का कारण बताया है जबकि ऐसा कुछ भी प्रदेश के भीतर नहीं है। जो इस संस्था के लिए या किसी व्यक्ति के लिए ख़तरे का कारण बने।
संजय शर्मा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों के साथ सत्ता में आई थी, आज वही सरकार भ्रष्टाचार की जांच करने वाली मुख्य एजेंसी को ही जनता की जवाबदेही से मुक्त कर रही है। यह अधिसूचना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सरकार के पास जनता से छिपाने के लिए बहुत कुछ है।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सतर्कता विभाग को आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत ‘सुरक्षा और खुफिया’ श्रेणी में डालकर सरकार अपने चहेते भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं को बचाना चाहती है। सतर्कता ब्यूरो कोई गुप्तचर संस्था नहीं, बल्कि जनहित में भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस निर्णय के बाद अब प्रदेश की जनता भ्रष्टाचार की जांचों की प्रगति, चार्जशीट में हो रही देरी और बड़े घोटालों से जुड़ी जानकारी नहीं ले पाएगी। यह सीधे तौर पर आम नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
संजय शर्मा ने सवाल किया कि आखिर मुख्यमंत्री को किस जांच का डर सता रहा है? क्या यह कवच इसलिए तैयार किया जा रहा है ताकि सरकार के कार्यकाल में हो रहे कथित घोटालों पर कोई सवाल न उठा सके? उन्होंने मांग की है कि सरकार इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस ले।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह ‘काला कानून’ रद्द नहीं किया गया, तो भारतीय जनता पार्टी न केवल सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी, बल्कि इस तानाशाहीपूर्ण निर्णय को उच्च न्यायालय में भी चुनौती देगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
