धमतरी, 27 जनवरी (हि.स.)। शहर के सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। नगर पालिक निगम धमतरी द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों, चौक – चौराहों और परिसर का नामकरण साहित्यकारों के नाम पर जाने की घोषणा की गई। यह निर्णय धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति एवं सिख समाज की दीर्घकालीन मांग का सकारात्मक और सम्मानजनक परिणाम है। जिससे संपूर्ण साहित्य जगत में हर्ष और गर्व का माहौल व्याप्त है। इस निर्णय के लिए 27 जनवरी को धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति एवं सिख समाज के प्रतिनिधियों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर महापौर रामू रोहरा महापौर के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समिति एवं समाज के सदस्यों ने महापौर का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया।

नगर पालिक निगम धमतरी द्वारा जिले के प्रसिद्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार, त्रिभुवन पांडे, मुकीम भारती एवं भगवती सेन के नाम से मार्गों का नामकरण किया जा रहा है। साथ ही हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाले कवि सुरजीत नवदीप के नाम से नालंदा परिसर का नामकरण किया जाना भी स्वीकृत किया गया है। यह निर्णय न केवल साहित्यकारों के रचनात्मक अवदान का सम्मान है, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए साहित्यिक प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत में धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति की ओर से डा चंद्रशेखर चौबे ने आभार पत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नगर की पहचान उसके साहित्य, संस्कृति और विचारशील परंपराओं से होती है। जिन साहित्यकारों ने अपने लेखन, चिंतन और सृजन से समाज को दिशा दी उनके नाम पर सार्वजनिक स्थलों का नामकरण वास्तव में सच्चा सम्मान है। धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमन लाल ध्रुव ने कहा कि नगर पालिक निगम धमतरी द्वारा जिले के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के नाम पर मार्गों एवं नालंदा परिसर का नामकरण किया जाना ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय है। समिति के संरक्षक गोपाल शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्यकार समाज के प्रहरी होते हैं। जिन साहित्यकारों के नाम से आज मार्गों का नामकरण किया जा रहा है उन्होंने अपने जीवनकाल में भाषा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समृद्ध किया। नगर निगम द्वारा लिया गया यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि रचनात्मक कार्य करने वालों को समाज कभी नहीं भूलता। इस कार्यक्रम में गुरुसिंग महासभा के सचिव सरदार जसपाल सिंग छाबड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि सिख समाज सदैव शिक्षा, साहित्य और सेवा को सर्वाेच्च स्थान देता आया है। नालंदा परिसर का नामकरण हास्य-व्यंग्य कवि सुरजीत नवदीप के नाम पर किया जाना यह दर्शाता है कि समाज में केवल गंभीर साहित्य ही नहीं, बल्कि व्यंग्य के माध्यम से सत्य कहने वाले रचनाकारों का भी उतना ही महत्व है।

महापौर रामू रोहरा ने कहा कि नगर पालिक निगम का दायित्व केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, नगर की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजना भी है। उन्होंने कहा कि धमतरी के साहित्यकारों ने अपने लेखन से न केवल जिले, बल्कि प्रदेश और देश स्तर पर पहचान बनाई है। ऐसे रचनाकारों के नाम पर मार्ग और परिसर का नामकरण करना नगर के लिए गौरव की बात है। इन्होंने जिला हिंदी साहित्य समिति एवं सिख समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा उठाई गई सकारात्मक मांगों पर नगर निगम सदैव गंभीरता से विचार करता है। इस अवसर पर मदन मोहन खंडेलवाल, डा भूपेंद्र सोनी, विनोद राव रणसिंग, डा सरिता दोशी, कामिनी कौशिक, लोकेश प्रजापति, गोपाल साहू, प्रेम शंकर चौबे, मंजीत छाबड़ा, प्रीतपाल सिंग छाबड़ा, हरमिंदर सिंग छाबड़ा, रंजीत छाबड़ा, जगजीवन सिद्धू, रजिंदर सिंह आजमानी, जसपाल सिंह देऊ सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा
