श्रीनगर, 01 अप्रैल ( हि.स.)। काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने बुधवार को तथ्यों में हेरफेर करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का दुरुपयोग करने के लिए पति-पत्नी की जोड़ी के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152, 62(2) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूए (पी)) की धारा 13, 38, 39 के तहत पुलिस स्टेशन सीआईके श्रीनगर में दर्ज एफआईआर संख्या 05/2025 के संबंध में डॉ उमर फारूक भट और उनकी पत्नी शहजादा अख्तर के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। बयान में कहा गया है कि मामला विश्वसनीय और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था जिसमें बताया गया था कि आरोपी शहजादा अख्तर ने सदस्यों के साथ एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची थी। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत और अपने पति डॉ उमर फारूक भट के साथ सक्रिय मिलीभगत से, कश्मीर की स्थिति के बारे में जानबूझकर झूठे, मनगढ़ंत और विकृत आख्यानों के निर्माण और प्रसार में शामिल थी।
जांच से पता चला कि आरोपी व्यक्ति, प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के साथ मिलकर, तथ्यों में हेरफेर करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन सहित सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के दुरुपयोग में लगे हुए थे। उनके द्वारा प्रसारित सामग्री का उद्देश्य अलगाववादी और अलगाववादी भावनाओं को बढ़ावा देना था जिससे भारत संघ के खिलाफ असंतोष, नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा मिलता था।
इसमें कहा गया है कि आगे की जांच से पता चला है कि आरोपी युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने, हिंसा भड़काने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के जानबूझकर इरादे से विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्य और आपराधिक दुर्भावना पैदा करने वाली सामग्री अपलोड करने और प्रसारित करने में भी शामिल थे। इस तरह की गतिविधियों ने शांति, शांति और राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
जांच के समापन पर इसकी पुष्टि करने वाले पर्याप्त सबूत एकत्र किए गए हैं भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दंडनीय अपराधों के कमीशन में दोनों आरोपी व्यक्तियों की संलिप्तता है। इसमें कहा गया है कि तदनुसार न्यायिक निर्धारण के लिए सक्षम अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता
