कानपुर, 08 फरवरी (हि.स.)। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने श्रीमद्भगवद गीता एवं वैदिक वांड़्मय शोधपीठ के कुशल संचालन एवं शोध गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रविवार को प्रोफेसर राजेश कुमार द्विवेदी सीडीसी को शोधपीठ का निदेशक एवं अनिल कुमार गुप्त को सह- निदेशक नियुक्त किया है।

कुलपित ने कहा कि गीता शोधपीठ का उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेष कर युवाओं को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना एवं भविष्य में एक अच्छे नेतृत्व एवं प्रबंधन की कुशलता में सक्षम बनाना है। आज के तनाव युक्त जीवन को नियंत्रित करने में भी गीता की माहिती भूमिका है। श्रीमद भगवद्गीता शोधपीठ विश्वविद्यालय परिसर में गीता से संबंधित व्याख्यान, प्रतियोगिताएं एवं सेमिनार के माध्यम से युवाओं में जागरूकता ला रही है । साथ ही मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ हो चुका है । इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों में गीता पर सेमिनार और प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। गीता भारतीय संस्कृति का वह अमूल्य ग्रंथ है जो केवल एक धार्मिक ग्रंथ न होकर मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन की भूमिका निभाता है।
गीता के उपदेश आत्म बल, समत्व, धैर्य और कर्तव्य निष्ठा का संदेश देते हैं। इसके सूत्र समय और परिस्थिति की सीमाओं से परे जाकर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं , जितने महाभारत काल में थे। विद्वानों ने गीता के सिद्धांतों को मनोविज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा, नेतृत्व, सामाजिक समरसता, अवसाद निवारण, डिजिटल युग, पर्यावरणीय स्थिरता तथा वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में प्रस्तुत किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
