मधुबनी, 05 मार्च (हि.स.)।जिला के सदर प्रखंड पंडौल अंतर्गत सरहद गांव में स्वतंत्रा सेनानी व कर्पूरी आन्दोलन के अग्रदूत स्व जटाशंकर दास की

103वीं जयंती मनायी गयी। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य विशिष्ट विद्वान व बुद्धिजिवियों ने स्व जटाशंकर दास के व्यक्तित्व कृतित्व तथा मिथिला मैथिली आन्दोलन के जनक बताया।

सिद्धहस्त कलाकार पद्मश्री सम्मानित शांति देवी ने कहा है कि आज जहां मैं खड़ी हूं उसमें जटा बाबू का बड़ा योगदान है। लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान द्वारा जिला के सरहद गांव में आयोजित स्वतंत्रता सेनानी जटाशंकर दास की 103 वीं स्मृति समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित की।अपनु उद्बोधन के दौरान भावुक पद्मश्री शांति देवी ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब वह महज 17-18 वर्ष की थी।गोदी में बच्चा लेकर स्टीमर से सन् 76-77 में पटना उद्योग विभाग पहुंचीं थीं। साथ में मात्र एक पेंटिंग था। डरी-सहमी कला संस्कृति विभाग के अधिकारी उपेन्द्र महारथी से मिली। बड़ा साहेब आपके क्षेत्र के हैं। फिर जटा बाबू से मिली। उन्होंने हौसला बढ़ाया और अपने बेटी की तरह स्नेह दिया।आज जटाशंकर बाबू के जन्म स्थान का दर्शन कर गदगद हो गई। मिथिला पेंटिंग आज देश-विदेश में देखते हैं, जानते हैं तो उसका श्रेय जटाशंकर दास को जाता है।
समारोह की अध्यक्षता करते पूर्व मुखिया डॉ. इंद्रमोहन झा ने कहा कि जटा बाबू पटना में अधिकारी रहे।लेकिन गांव में सरहद के पुत्र के रूप में भूमिका निभाते थे। यही कारण है कि मेरे ऐसे साधारण लोगों पर भी वे अपना स्नेह बरसाते थे। वहीं किसान – मजदूर नेता अधनू यादव ने भी उनके साथ संघर्ष किया । विभिन्न अनुभव का उल्लेख अपने संबोधन में किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जटाशंकर दास के तैलचित्र पर पुष्पांजलि के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों को पाग दोपटा एवं माला से मिथिला पेंटिंग से सम्मानित किया गया। सम्मानित करने वालों में लोकहित रंगपीठ प्रशिक्षण केन्द्र प्रभारी प्रशिक्षक रूपा कुमारी, प्रशिक्षु आकृति, खुशबू, ज्योति, अंजली ने किया वहीं शिवानी, सीमा, रुपाली और सीमा ने स्वागतगान से सभी का मनमोह लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / लम्बोदर झा
