शिमला, 10 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि आगामी बजट में पेंशनरों के बकाया वित्तीय लाभों के भुगतान के लिए स्पष्ट प्रावधान किया जाए। समिति ने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

शिमला में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार 21 मार्च को बजट पेश करने जा रही है और इससे पहले पेंशनरों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के कई वित्तीय लाभ लंबे समय से लंबित हैं और सरकार को इनके भुगतान के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान करना चाहिए।
भूप राम वर्मा ने बताया कि 5 मार्च को सुंदरनगर में पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की राज्य स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 16 मार्च को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में पेंशनर धरना-प्रदर्शन करेंगे और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आगामी बजट में पेंशनरों की 60 से 70 प्रतिशत लंबित देनदारियों के भुगतान का भरोसा देती है तो 30 मार्च को शिमला में प्रस्तावित राज्य स्तरीय रैली को स्थगित करने पर भी विचार किया जा सकता है। लेकिन अगर बजट में पेंशनरों की मांगों की अनदेखी की गई तो 30 मार्च को बजट सत्र के दौरान शिमला में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
वर्मा ने मुख्यमंत्री से जल्द संयुक्त परामर्श समिति (जेसीसी) की बैठक बुलाने की भी मांग की। उनका कहना था कि इस बैठक के माध्यम से पेंशनरों की लंबित समस्याओं और देनदारियों के समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा सकते हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश जॉइंट फ्रंट के नेता आत्माराम शर्मा के हालिया बयान की भी आलोचना की। वर्मा ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी पेंशनरों के बीच फूट डालने की कोशिश है। उनका कहना था कि पेंशनर किसी भी राजनीतिक या वैचारिक मतभेद से ऊपर हैं और उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने वित्तीय अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि पेंशनरों की लंबित देनदारियों का मुद्दा लंबे समय से उठा रहा है और अब पेंशनर चाहते हैं कि सरकार इस पर ठोस फैसला ले। यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो पेंशनर प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
