बीकानेर, 23 मार्च (हि.स.)। राजस्थान राज्य अभिलेखागार द्वारा सोमवार को राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में “अभिलेखीय दस्तावेज: उनका प्रबंधन और इतिहास लेखन में भूमिका” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारम्भ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं वंदे मातरम् के साथ किया गया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विधायक (बीकानेर पश्चिम) जेठानंद व्यास, विशिष्ट अतिथि सचिव, कला साहित्य-संस्कृति, खादी व ग्राम इंडस्ट्रीज विभाग, दिल्ली सरकार कुमार महेश, मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष (इतिहास व इतिहास केन्द्र) पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला प्रो. दलजीत सिंह, निदेशक राजस्थान राज्य अभिलेखागार चन्द्रसेन सिंह शेखावत तथा सहायक निदेशक अभिलेखागार डॉ. बसंत सिंह सोलंकी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि विधायक जेठानंद व्यास ने अभिलेखागार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास से जुड़े किसी भी विषय का समाधान अभिलेखों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने महाराजा गंगासिंह की दूरदर्शिता, गंगनहर निर्माण एवं गंगारिसाला के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि सचिव कुमार महेश ने गजेटियर, यूपीएससी, अभिलेख व्यवस्था, प्रशिक्षण कार्यक्रम, डिजिटल रिकॉर्ड एवं निजी अभिलेखों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने देश के अन्य अभिलेखागारों के निदेशकों को बीकानेर अभिलेखागार की व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया।
मुख्य वक्ता प्रो. दलजीत सिंह ने राजपूत-सिख संबंध, बंदा सिंह बहादुर के पत्राचार, महाराजा भूपेन्द्र सिंह और गंगासिंह के मध्य गंगनहर संबंधी पत्राचार तथा अखबार-ए-दरबार जैसे विषयों पर व्याख्यान दिया।
निदेशक चन्द्रसेन सिंह शेखावत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए अभिलेखागार की गतिविधियों की जानकारी दी, वहीं सेमिनार संयोजक सहायक निदेशक डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने दो दिवसीय सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। हरिमोहन मीना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सेमिनार के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें डिजिटलीकरण, अभिलेखागार का भविष्य, मारवाड़ी व्यापार, राष्ट्रीय एकीकरण, प्रजामंडल आंदोलनों, ऐतिहासिक प्रबंधन, वैश्विक अभिलेखीय संदर्भ एवं हाशिए पर रहने वाले लोगों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव
