
अशोकनगर, 14 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महान संगीतज्ञ बैजू बावरा की स्मृति में बैजू बावरा समारोह का आयोजन 15 से 17 मार्च तक किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा इस आयोजन को लेकर सभी प्रकार की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने शनिवार को बताया कि महान संगीतज्ञ बैजू बावरा को आदरांजलि स्वरूप यह प्रतिष्ठापूर्ण समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय समारोह के प्रथम दिवस 15 मार्च 2026 को सायं 7 बजे से सर्वप्रथम अकादमी के प्रतिष्ठित मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार का अलंकरण समारोह आयोजित होगा। इसमें दो पुरस्कार मूर्तिकला एवं आठ पुरस्कार चित्रकला विधा के लिए प्रदान किये जाएंगे, जिसमें दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार, रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार, नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार, मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार, देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार, जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार, सैय्यद हैदर रजा पुरस्कार, लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार, राममनोहर सिन्हा पुरस्कार एवं विष्णु चिंचालकर पुरस्कार सम्मिलित हैं।
अलंकरण समारोह के साथ ही रूपंकर कला पुरस्कार के लिए आमंत्रित कलाकृतियों में से 80 कलाकृतियों की प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है। साथ ही मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के ललित कला महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं तीनों दिवस चंदेरी के विभिन्न स्थलों का सजीव चित्रांकन भी करेंगे।प्रथम दिवस अलंकरण समारोह पश्चात पूर्वरंग के अंतर्गत सुश्री दीपिका पुरोहित, भोपाल का पारम्परिक बुंदेली भजन गायन होगा। इसके बाद सुविख्यात भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा एवं साथी, मुम्बई का सूफी एवं भजन गायन होगा।
समारोह के द्वितीय दिवस 16 मार्च, 2026 को अफजल हुसैन, भोपाल ध्रुपद गायन होगा। इसके बाद डॉ. निखिल बड़ोदिया, इंदौर की सितार वादन की सभा सजेगी। तत्पश्चात संघमित्रा तायवाड़े, भोपाल द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी। अंत में बलवंत पुराणिक, भोपाल का कांच वाद्य वादन होगा। अंतिम दिवस 17 मार्च, 2026 को सर्वप्रथम उल्हास तैलंग, भोपाल की गायन सभा सजेगी। इसके बाद फारुख लतीफ खां, मुम्बई का सारंगी वादन होगा। तत्पश्चात शिप्रा सुल्लेरे, जबलपुर का शास्त्रीय गायन होगा। अंतिम प्रस्तुति आरती श्रीवास्तव, दिल्ली का कथक समूह नृत्य होगा। हुनर में पारम्परिक शिल्पों की कार्यशाला सह विक्रय किया जाएगा।
इस समारोह का मुख्य रूप से बहुविध कला उत्सव का स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से ‘हुनर’ कार्यशाला सह विक्रय के 10 स्टॉल भी लगाये जा रहे हैं। जहां पारम्परिक शिल्पकला के कलाकार शिल्पों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही अशोकनगर जिले के एक जिला एक उत्पाद के 10 स्टॉल एवं पारम्परिक व्यंजनों के उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
—–nirmal vishwakarma———-
हिन्दुस्थान समाचार / Nirmal Kumar Vishwkarma
