शिमला, 09 फ़रवरी (हि.स.)। राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में मरीजों से लिए जाने वाले कई शुल्क बढ़ाने का फैसला किया गया है। अब अस्पताल में पीईटी-सीटी (पैट स्कैन) की जांच लगभग 10 हजार रुपये में होगी, जबकि एमआरआई की दर 2750 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही स्पेशल वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए भी संशोधित दरें लागू की गई हैं। इससे निजी सुविधा लेने वाले मरीजों पर पहले की तुलना में अधिक खर्च आएगा।

यह निर्णय सोमवार को आईजीएमसी में आयोजित रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की गवर्निंग बॉडी की 14वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने की। बैठक में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान समिति द्वारा किए गए खर्चों को मंजूरी दी गई और वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान को भी पारित किया गया।

बैठक में रेडियोलॉजी और ऑन्कोलॉजी विभागों ने नई 3 टेस्ला एमआरआई और पीईटी-सीटी मशीनों को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। इन आधुनिक जांच सुविधाओं की दरें तय करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। समिति ने तय किया कि जांच सेवाओं की दरों को व्यावहारिक रखते हुए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा की दरों से तुलना करके अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अस्पताल में पंजीकरण के समय सभी मरीजों से 10 रुपये का परामर्श शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क 5 जनवरी से लागू किया जा चुका है और राज्य के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसी प्रकार का शुल्क लिया जा रहा है।
आईजीएमसी परिसर में संचालित सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन की दुकान का किराया भी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अभी तक दुकान का किराया वार्षिक टर्नओवर का 1 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
बैठक में अस्पताल में उपकरणों की जरूरतों पर भी चर्चा हुई। मेडिकल एंड नर्सिंग सेंटर के रेडियोलॉजी विभाग में स्थापित पुरानी कलर डॉप्लर यूएसजी मशीन अब काम नहीं कर रही है और उसकी वारंटी अवधि भी समाप्त हो चुकी है। अस्पताल के सुचारु संचालन के लिए नई कलर डॉप्लर यूएसजी मशीन खरीदने की आवश्यकता बताई गई, जिस पर लगभग 50 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसी तरह ऑपरेशन थियेटर में इस्तेमाल हो रही एक पुरानी ओटी टेबल भी खराब हो चुकी है और मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लगभग 30 लाख रुपये की लागत से नई ओटी टेबल खरीदने की जरूरत जताई गई है।
आरकेएस के कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर भी बैठक में चर्चा हुई। समिति के तहत कुल 91 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कुछ कर्मचारियों को नियमित वेतनमान और भत्ते मिल रहे हैं, जबकि अन्य कर्मचारियों को निर्धारित प्रारंभिक वेतनमान के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों को छठा वेतनमान लागू करने और लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित वेतनमान देने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जांचों की बढ़ी हुई दरों का प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। साथ ही हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों की बकाया देनदारियां चुकाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है, जिससे मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा न आए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
