हुगली, 10 मार्च (हि. स.)। हुगली-चुंचुड़ा नगर पालिका के वार्ड संख्या एक के बूथ संख्या 175 के निवासियों ने राज्य सरकार की ‘आमदेर पाड़ा, आमादेर समाधान’ योजना के तहत किए गए कार्यों पर असंतोष जताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से जल निकासी और सड़क प्रकाश की समस्या बनी हुई है, लेकिन योजना के तहत उनकी मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश या पानी भरने की स्थिति में घरों में पानी घुस जाता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को लेकर उन्होंने योजना के तहत आवेदन भी किया था।
राज्य सरकार की ‘आमदेर पाड़ा, आमादेर समाधान’ योजना के अंतर्गत प्रत्येक बूथ के लिए लगभग 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना में स्थानीय लोगों से उनकी समस्याएं जानकर उसी आधार पर कार्य किए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी मुख्य समस्या जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई। इसके बजाय इलाके में केवल एक बिजली का खंभा लगा दिया गया। उनका कहना है कि पहले जिन खंभों पर स्ट्रीट लाइट जलती थी, अब उनमें से कई बंद पड़े हैं, जिसके कारण पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है।
निवासियों का कहना है कि जिस राशि से एक खंभा और लाइट लगाई गई है, उसी पैसे से पूरे इलाके में रोशनी की व्यवस्था की जा सकती थी। उनकी मुख्य समस्या का समाधान नहीं होने से लोग नाराज हैं।
भाजपा नेता स्वपन पाल ने मंगलवार को नगर पालिका प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि नगर पालिका लोगों को बुनियादी सेवाएं देने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाओं पर भी ठीक से काम नहीं हुआ है, जिससे निवासियों में असंतोष है। उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस केवल कमीशन और राजनीतिक लाभ की राजनीति करती है।
वहीं, चुंचुड़ा नगर पालिका के चेयरमैन सौमित्र घोष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस योजना के तहत कौन सा काम किया जाएगा, यह न तो पार्षद तय करते हैं और न ही नगर प्रमुख, बल्कि स्थानीय लोग स्वयं तय करते हैं। स्थानीय लोगों ने लिखित आवेदन दिया था उसी आधार पर सरकार ने कार्रवाई की।
घोष ने कहा कि यदि स्थानीय लोगों ने एक बिजली के खंभे की मांग की थी उसी अनुसार काम किया गया। यदि अन्य स्थानों पर भी रोशनी की मांग थी, तो लोगों को ‘आमदेर पाड़ा, आमादेर समाधान’ शिविर में इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उन्होंने इस योजना को एक अनूठी पहल बताते हुए कहा कि इसमें वही कार्य किए जाते हैं, जिनकी मांग आम लोग करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
