कोलकाता, 11 मार्च (हि.स.)। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चर्चित दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई से कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को स्वयं को अलग कर लिया।

न्यायमूर्ति देबांशु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर राशिदी की खंडपीठ ने कहा कि जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम ने इस मामले को उनकी पीठ को सौंपा था, तब यह पीठ आपराधिक मामलों की सुनवाई कर रही थी। हालांकि वर्तमान में यह पीठ आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर रही है, इसलिए उन्होंने इस मामले की सुनवाई से अलग होने का निर्णय लिया।
खंडपीठ ने मामले को पुनः वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के पास भेज दिया है, जो अब यह तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई किस नई पीठ द्वारा की जाएगी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता के माता-पिता द्वारा की गई त्वरित सुनवाई की मांग को इस पीठ के समक्ष पूरा करना संभव नहीं है।
उल्लेखनीय है कि, 9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार कक्ष से दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई एक जूनियर चिकित्सक का शव बरामद किया गया था।
लंबी सुनवाई के बाद कोलकाता की निचली अदालत ने मामले के एकमात्र आरोपित संजय रॉय, जो कोलकाता पुलिस का पूर्व नागरिक स्वयंसेवक था, को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हालांकि, पीड़िता के माता-पिता केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से संतुष्ट नहीं हैं, विशेषकर इस निष्कर्ष से कि इस मामले में संजय रॉय ही एकमात्र दोषी है। इसी कारण उन्होंने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने मामले की त्वरित सुनवाई की भी मांग की है।
इस बीच, सीबीआई इस घटना के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की संभावना को लेकर अपनी जांच जारी रखे हुए है और इस संबंध में निचली अदालत में प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर चुका है।
अब न्यायमूर्ति देबांशु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर राशिदी की पीठ के अलग होने के बाद यह देखना होगा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय की किस नई पीठ को इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई सौंपी जाती है।——————-
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
