जयपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) द्वारा आयोजित सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा रविवार को प्रदेशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई। पहले दिन परीक्षा में करीब 60 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा दो पारियों में आयोजित की गई। पहली पारी सुबह 11 बजे से 1 बजे तक और दूसरी पारी दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक हुई।

आयोग के आंकड़ों के अनुसार पहली पारी में 60.38 प्रतिशत तथा दूसरी पारी में 59.96 प्रतिशत अभ्यर्थी उपस्थित रहे। प्रदेश के 26 जिलों के 41 शहरों में बनाए गए 1174 परीक्षा केंद्रों पर करीब 7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान था। पूर्व में पेपर लीक और नकल की घटनाओं को देखते हुए इस बार परीक्षा में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई। सभी केंद्रों पर थ्री-लेयर सिक्योरिटी, मेटल डिटेक्टर और विशेष प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। पुलिसकर्मियों को ब्लूटूथ डिवाइस, छिपे कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
अजमेर में आरपीएससी सचिव रामनिवास मेहता स्वयं परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करते नजर आए। उन्होंने अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जांचे और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया। सख्त नियमों के चलते कई अभ्यर्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई केंद्रों पर फुल स्लीव्स शर्ट, जूते और ज्वेलरी पहनकर आए अभ्यर्थियों को प्रवेश से पहले इन्हें उतारना पड़ा। कहीं-कहीं शर्ट की आस्तीन तक काटी गई, तो कुछ अभ्यर्थियों को बिना जूते ही परीक्षा देनी पड़ी।
जयपुर, सीकर, झुंझुनूं और अलवर सहित कई जिलों में मामूली देरी से पहुंचे अभ्यर्थियों को भी प्रवेश नहीं दिया गया। झुंझुनूं के चिड़ावा में एक युवती को मात्र एक मिनट की देरी से एंट्री नहीं मिली, जिससे वह केंद्र के बाहर ही बेसुध हो गई।
वहीं सीकर और पाली में भी कई अभ्यर्थी गेट बंद होने के बाद रोते-बिलखते नजर आए।
कड़ी चेकिंग से बचने के लिए अधिकांश अभ्यर्थियों ने पहली पारी के बाद परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलना उचित नहीं समझा। जो बाहर निकले, उन्हें दोबारा प्रवेश से पहले सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। भरतपुर में परीक्षा समाप्त होने के बाद बस स्टैंड पर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सीट पाने की होड़ में कई अभ्यर्थी बसों में खिड़की से घुसते नजर आए, जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। मौके पर पुलिस और क्यूआरटी टीम को व्यवस्था संभालनी पड़ी।
परीक्षा के पहले दिन 3.85 लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 3.32 लाख ने पहली पारी में भाग लिया। हालांकि, 1607 अभ्यर्थी ऐसे रहे, जो पहली पारी देने के बाद दूसरी पारी में शामिल नहीं हुए। आयोग ने साफ किया कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस बार सख्त कदम उठाए गए हैं। हालांकि, अभ्यर्थियों ने अत्यधिक सख्ती और कुछ स्थानों पर अव्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई।
पहले दिन परीक्षा शांतिपूर्ण रही, लेकिन कड़े नियमों और व्यवस्थाओं ने अभ्यर्थियों के अनुभव को चुनौतीपूर्ण बना दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
