कोलकाता, 12 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न हुई ईंधन संकट को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अगले सप्ताह कोलकाता में विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने इस संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस प्रमुख सोमवार को सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगी। हालांकि मार्च का मार्ग अभी तय नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया और अरब क्षेत्र में जारी संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने लगा है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है और इस मार्ग के प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन आपूर्ति बाधित हुई है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस संकट का पूर्वानुमान लगाने और आवश्यक तैयारी करने में विफल रही। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रसोई गैस की बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर क्यों किया गया और देश में उपलब्ध गैस भंडार की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
इससे पहले मुख्यमंत्री मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की वैधता के मुद्दे पर धर्मतल्ला में धरना भी दे चुकी हैं। उस दौरान भी उन्होंने ईंधन संकट का मुद्दा उठाया था। अब उन्होंने विरोध को तेज करते हुए सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को तेल कंपनियों और रसोई गैस वितरकों के प्रतिनिधियों के साथ आपात बैठक भी की थी। बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति अभी गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में समस्या सामने आ रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध गैस भंडार को फिलहाल राज्य के बाहर नहीं भेजने का निर्देश दिया गया है। साथ ही इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार एक मानक कार्यप्रणाली भी तैयार करेगी।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित विरोध मार्च की रूपरेखा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।——————–
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
