
सुपौल, 25 मार्च (हि.स.)। चैती छठ पूजा के पावन अवसर पर उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व बुधवार की सुबह संपन्न हो गया। अहले सुबह से ही जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।व्रती महिलाएं और पुरुष पूरी श्रद्धा और नियम के साथ घाटों पर पहुंचे और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

घाटों पर “छठी मैया” के गीतों और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा। व्रतियों की आस्था और समर्पण ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कई श्रद्धालु दंड प्रणाम करते हुए घाटों तक पहुंचे, जो इस पर्व की कठिन साधना और अटूट विश्वास को दर्शाता है। सुपौल के विभिन्न छठ घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और साफ-सफाई की व्यवस्था ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर विशेष पूजा-अर्चना की और बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया। वहीं, कई घरों में भी आंगन में कृत्रिम घाट बनाकर छठी मैया की पूजा की गई, जिससे यह पर्व हर घर तक अपनी आस्था की रोशनी फैलाता नजर आया।
चार दिनों तक चले इस महापर्व में व्रतियों ने कठोर नियमों का पालन करते हुए निर्जला व्रत रखा। उनकी आस्था, संयम और श्रद्धा ने इस पर्व को और भी खास बना दिया। छठ पूजा के समापन के साथ ही श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष और मन में अपार शांति का भाव देखने को मिला।
चैती छठ ने एक बार फिर सुपौल में आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दिया, जहां हर कोई छठी मैया की भक्ति में लीन नजर आया।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र
