रायबरेली, 14 मार्च (हि.स.)। एनटीपीसी विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी आधुनिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, हाइड्रो) और जैव-विविधता नीति (2022) के माध्यम से एक नजीर पेश कर रही है। यह विचार शनिवार को एनटीपीसी के आवासीय परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान ऊंचाहार परियोजना के प्रमुख विश्व मोहन सिंह ने व्यक्त किए ।

उन्होंने बताया कि विद्युत’उत्पादन में वृद्धि, ग्रीन हाउस गैसों में कमी’ के लक्ष्य के तहत, कम्पनी 2032 तक 60 जी डब्लू नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी ने 2032 तक 60 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें सोलर और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कम्पनी अपने थर्मल पावर प्लांटों में फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर जैसी नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर रही है। कम्पनी ने जैव-विविधता के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए विशेष नीति अपनाई है।
इससे पूर्व सामुदायिक विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए वरिष्ठ प्रबंधक श्वेता त्रिपाठी ने बताया कि एनटीपीसी ने आसपास के गांवों के बच्चों को समर कैम्प द्वारा आधुनिक शिक्षा और स्वावलम्बन हेतु प्रशिक्षित किया है । इसके साथ स्वास्थ्य, सड़क जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम किया गया है। समारोह में महाप्रबंधक आशुतोष बिस्वास, दिलीप कुमार साहू, एस यू हरिदास, मानव संसाधन प्रमुख पंकज कुमार, अपर महाप्रबंधक प्रीति सिन्हा सहित एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मानव संसाधन प्रमुख पंकज कुमार ने कहा कि देश के कुल बिजली उत्पादन का चौथाई हिस्सा एनटीपीसी द्वारा उत्पादन होता है और एनटीपीसी कोयला, गैस, सोलर, विंड, हाइड्रो के साथ परमाणु क्षेत्र में भी पैठ बना चुकी है। एनर्जी ट्रांजिशन एनटीपीसी के भावी प्रक्रिया में प्रमुखता से शामिल है।कार्यक्रम का संचालन आज्ञा शरण सिंह ने तथा आभार प्रदर्शन डी जी एम एकता साहू ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रजनीश पांडे
