शिमला, 28 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। कार्मिक (नियुक्ति-II) विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ नियम 19 के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मुख्य सचिव की ओर से जारी यह पत्र सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को भेजा गया है। इसमें 17 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए बताया गया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत चिट्टा या अन्य ड्रग्स के कब्जे, तस्करी, परिवहन, वित्तपोषण या सहयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज होती है, तो नियुक्ति या अनुशासनात्मक प्राधिकारी नियम 19, सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 लागू कर सकते हैं, लेकिन यह कदम तथ्यों की सावधानीपूर्वक जांच और ठोस कारण दर्ज करने के बाद ही उठाया जाना चाहिए। साथ ही इसे सामान्य या नियमित प्रक्रिया के रूप में अपनाने से भी मना किया गया है।

सरकार ने कहा है कि बाद में यह भ्रम पैदा हुआ कि किन परिस्थितियों में नियम 19 लागू किया जा सकता है। इसे दूर करते हुए अब साफ किया गया है कि नियम 19 की कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में की जाएगी, जहां संबंधित सरकारी कर्मचारी को सक्षम अदालत द्वारा एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी करार दिया गया हो। केवल एफआईआर दर्ज होना, जांच चलना, चालान दाखिल होना या मुकदमा लंबित होना अपने आप में नियम 19 लागू करने का आधार नहीं होगा।
पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि नियुक्ति और अनुशासनात्मक प्राधिकारी हर मामले में कानून, न्यायालयों के फैसलों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करें तथा कार्रवाई से पहले लिखित रूप में ठोस और तर्कसंगत कारण दर्ज करें। सरकार ने सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को इन निर्देशों का व्यापक प्रसार कर सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
