गोरखपुर, 10 मार्च (हि.स.)। एम्स गोरखपुर के चिकित्सकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सर्वाइकल वर्टिब्रा से उत्पन्न एंटीरियर सर्वाइकल ऑस्टियोफाइट का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। ऐसे मामलों की घटनाएं लगभग 1% पाई जाती हैं। सामान्यतः यह हड्डी का उभार छोटा होता है और अधिकांश मामलों में कोई लक्षण उत्पन्न नहीं करता, लेकिन कुछ मामलों में यह बढ़कर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।

68 वर्षीय मरीज़ को लगभग 1 वर्ष से खाने में दिक्कत थी। जो धीरे-धीरे बढ़ती गयी। हाल के समय में मरीज को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर मरीज के सांस की नली में ट्यूब डालकर ट्रेकियोस्टॉमी की गई, ताकि श्वसन मार्ग सुरक्षित रखा जा सके। ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञों ने गर्दन के सामने के हिस्से से पहुंच बनाकर बढ़ी हुई हड्डी को सुरक्षित रूप से हटाया। यह जटिल ऑपरेशन ईएनटी और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
इस सर्जरी का नेतृत्व ईएनटी विभाग की डॉ. रुचिका अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. पंखुरी मित्तल (असिस्टेंट प्रोफेसर) तथा डॉ. अश्वनी चौधरी (एसोसिएट प्रोफेसर) और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. निनाद आनंद सावंत (एसोसिएट प्रोफेसर) तथा डॉ. सार्थक मेहता (असिस्टेंट प्रोफेसर) ने किया।
सर्जरी में ईएनटी विभाग की टीम के साथ सहायक के रूप में डॉ. नैंसी गुप्ता, डॉ.श्वेता सिंह और डॉ. नंधिनी एस. प्रिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान प्रशासन ने इस सर्जरी को उन्नत बहु-विभागीय चिकित्सा सहयोग (मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की जटिल सर्जरी मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय
