हुगली, 25 फ़रवरी (हि.स.)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में न्यायाधीशों की नियुक्ति के चलते आम न्यायप्रार्थियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण चुंचुड़ा स्थित जिला जज कोर्ट में देखने को मिला, जहां कई अदालत कक्षों में नियमित सुनवाई ठप रही।

मिली जानकारी के अनुसार, जिला जज सहित कई अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों को एसआईआर कार्य में लगाए जाने के कारण अधिकांश अदालतों में सुनवाई नहीं हो सकी। नतीजतन, केवल सीजेएम कोर्ट और थर्ड कोर्ट में ही न्यायाधीश उपस्थित थे। अन्य अदालतों में मामलों की सुनवाई न होने से दूर-दराज़ से आए न्यायप्रार्थियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

भाजपा से जुड़े अधिवक्ता स्वपन पाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पूरी तरह सही है। यदि यह फैसला पहले आता तो और बेहतर होता। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में फर्जी और अवैध नाम जोड़ने की कोशिशों पर अब प्रभावी रोक लगेगी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े अधिवक्ता निर्माल्य चक्रवर्ती का कहना है कि एसआईआर ड्यूटी के चलते अदालतों का सामान्य कामकाज बाधित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद अधिकांश न्यायाधीश एसआईआर कार्य में व्यस्त हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि न्याय व्यवस्था निष्पक्ष है और पारदर्शिता की मांग स्वयं मुख्यमंत्री ने की थी।
अधिवक्ता शुभदीप दास ने कहा कि पहले से ही न्यायाधीशों की भारी कमी है। ऐसे में एसआईआर कार्य के कारण अदालतों में आने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
अदालत परिसर में मौजूद कई न्यायप्रार्थियों ने बताया कि सुनवाई न होने से उन्हें बिना किसी प्रगति के लौटना पड़ा, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों हुआ।
कुल मिलाकर, एसआईआर कार्य की अनिवार्यता और न्यायालयों के नियमित संचालन के बीच संतुलन न बन पाने से न्यायप्रणाली पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
आम लोगों की मांग है कि वैकल्पिक व्यवस्था कर अदालतों का नियमित कामकाज जल्द बहाल किया जाए, ताकि न्यायप्रार्थियों को राहत मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
