भुवनेश्वर, 16 अप्रैल (हि.स.)। ओडिशा सरकार ने समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और तटीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मरीन स्पेशियल प्लान (एमएसपी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संबंध में लोक सेवा भवन में राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और नेशनल सेंटर फार कोस्टल रिसर्च (एनसीसीआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उपस्थित थे।

इस समझौते पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अतिरिक्त सचिव पूजा मिश्रा और एनसीसीआर के निदेशक डॉ. आर.एस. कंकारा ने हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि एमएसपी न केवल राज्य की ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देगा, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी के संरक्षण को भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल तटीय क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी और समुद्री जैव विविधता की रक्षा करते हुए एकीकृत तटीय एवं समुद्री योजना का नया मानक स्थापित करेगी।
उन्होंने बताया कि भारत में सतत समुद्री योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में भारत और नॉर्वे सरकार के सहयोग से हुई थी। इसके पहले चरण में इसे पुडुचेरी और लक्षद्वीप में लागू किया गया था, जबकि दूसरे चरण में ओडिशा इस योजना को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा के तटीय और समुद्री क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध हैं और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं, जो आजीविका, आर्थिक विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, बढ़ती विकास गतिविधियों और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण समुद्री पारिस्थितिकी के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ गई है। एमएसपी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम है।
उन्होंने बताया कि यह योजना मत्स्य पालन, पर्यटन, बंदरगाह, समुद्री ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्ष अगस्त में ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर की शुरुआत की गई थी, जो इस पहल को और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2036 तक समृद्ध ओडिशा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तटीय आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को आवश्यक बताया। उन्होंने इस पहल के लिए नॉर्वे सरकार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर समर्थन को भी सराहा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने कहा कि एनसीसीआर समुद्री अनुसंधान का एक अग्रणी संस्थान है और विभाग एमएसपी के सफल क्रियान्वयन के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने इसे वर्ष 2036 और 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह समुद्री संसाधनों के अधिकतम उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करेगा।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि भारत के विजन 2047 को साकार करने के लिए सभी क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ जलवायु चुनौतियों का समाधान आवश्यक है, जिसमें एमएसपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रॉयल नॉर्वेजियन एम्बेसी के उप राजदूत अरविन गाडगिल ने कहा कि ओडिशा का समुद्री व्यापार इतिहास समृद्ध रहा है और लंबी तटरेखा इसे विशेष बनाती है। उन्होंने इस पहल में नॉर्वे की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव चित्रा अरुमुगम ने स्वागत भाषण दिया और एमएसपी कार्यक्रम पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर राज्य सरकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और नॉर्वे सरकार के प्रतिनिधियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो
