गांदरबल, 17 मार्च (हि.स.)। गांदरबल के कंगन कोर्ट ने करोड़ों रुपये के ऑनलाइन घोटाले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

मूनिस वाहिद की अध्यक्षता में कंगन के प्रथम श्रेणी सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पुलिस स्टेशन कंगन में दर्ज एफआईआर संख्या 28/2025 में शाहनवाज अहमद शाह, रुमैसा जान और डॉ. आमिर बशीर मगरे की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इस मामले की जांच कश्मीर अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 318(4) और 61(2) के तहत 51 करोड़ रुपये से अधिक के संगठित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप हैं। शाहनवाज अहमद शाह जम्मू-कश्मीर बैंक के कर्मचारी हैं। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी अलियास ख्वाजा उपस्थित हुए जिन्होंने अपराध की गंभीरता और व्यापकता, अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच, चल रही जांच और इस तथ्य के आधार पर जमानत आवेदनों का विरोध किया कि एक सह-आरोपी फरार है जबकि पूरक आरोपपत्र अभी तक दाखिल नहीं किया गया है।
जांच में आरोपी से जुड़े कई बैंक खातों का पता चला है जिन पर विभिन्न राज्यों की साइबर पुलिस इकाइयों की शिकायतों के आधार पर रोक लगाई गई थी, इसके अलावा हजारों यूपीआई लेनदेन भी मिले हैं जो कई पीड़ितों को प्रभावित करने वाले एक व्यवस्थित ऑनलाइन धोखाधड़ी का संकेत देते हैं। जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह के आर्थिक अपराधों के गंभीर सामाजिक परिणाम होते हैं और इनसे निपटने के लिए सख्त दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि बड़ी संख्या में पीड़ितों को प्रभावित करने वाले संगठित वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सामाजिक हित को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर रखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऑनलाइन ट्रेडिंग और गेमिंग से संबंधित धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा गंभीर सामाजिक नुकसान पहुंचा रहा है और इस तरह की लत से प्रेरित योजनाएं मादक पदार्थों की लत के समान काम करती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह
