नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को ‘इंद्रप्रस्थ कल्चरल फेस्टिवल’ भारत हैबिटेट सेंटर में शुभारंभ किया। दिल्ली सरकार द्वारा 3 से 5 अप्रैल तक चलाने वाले इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में 100 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ता, 50 से अधिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, साहित्यिक सत्र, युवा टाउनहॉल और विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और समकालीन सांस्कृतिक विमर्श को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

कपिल मिश्रा ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम का चयन अपने आप में एक सांस्कृतिक घोषणा है। यह दिल्ली की उस ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनः स्थापित करने का प्रयास है, जिसे लंबे समय तक सीमित दृष्टिकोण में प्रस्तुत किया जाता रहा।
उन्होंने संगम टॉक्स और आयोजन से जुड़े सभी सहभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच, जहां संवाद तथ्य, तर्क और प्रमाण पर आधारित हो, वही समाज को सही दिशा देते हैं। जब विमर्श वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ता है, तब भ्रम और असत्य स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
दिल्ली की बहुसांस्कृतिक पहचान पर प्रकाश डालते हुए मिश्रा ने कहा कि “दिल्ली ‘मिनी इंडिया’ के रूप में देश के हर क्षेत्र की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का केंद्र है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के त्योहार और परंपराएं अपने सबसे व्यापक और जीवंत स्वरूप में दिखाई देती हैं। यही दिल्ली की वास्तविक पहचान है और उसी पहचान को सशक्त करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने पिछले एक वर्ष में दिल्ली सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों और पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि “राजधानी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को नई ऊर्जा और व्यापकता दी गई है। कर्तव्य पथ पर दीपोत्सव, यमुना तट पर छठ पर्व के भव्य आयोजन, तीज एवं नवरात्रि जैसे उत्सवों का व्यापक स्तर पर आयोजन और विश्वविद्यालयों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ कार्यक्रमों का संचालन इन सभी प्रयासों ने दिल्ली की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है।
कपिल मिश्रा ने कहा कि इंद्रप्रस्थ कल्चरल फेस्टिवल के माध्यम से एक महत्वपूर्ण शुरुआत हो रही है, जहां देशभर से जाने-माने इतिहासकार, लेखक, कलाकार और साहित्यकार एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। यह तीन दिवसीय आयोजन दिल्ली के भारत हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया जा रहा है और सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे इसमें सहभागिता करें और दिल्ली के उस वास्तविक इतिहास को जानें, जिसे लंबे समय तक पर्याप्त रूप से सामने नहीं लाया गया। उन्होंने वैचारिक विमर्श पर जोर देते हुए कहा कि जब समाज में तथ्य, तर्क और सत्य पर आधारित चर्चा होती है, तब भ्रामक प्रवृत्तियां टिक नहीं पातीं और एक सकारात्मक सांस्कृतिक चेतना का निर्माण होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव
