
बीरभूम, 08 फरवरी (हि.स.)।पूर्वांचल कल्याण आश्रम के तत्वावधान में रविवार को बीरभूम जिले के नलहाटी स्थित दुर्गा देवी मस्कारा सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में एक भव्य सामूहिक आदिवासी विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कोलकाता, हावड़ा और नलहाटी के स्वयंसेवकों ने सामूहिक सहभागिता निभाते हुए आयोजन को ऐतिहासिक और अनुकरणीय बनाया।

समारोह के दौरान 61 आदिवासी जोड़ों का विवाह पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों एवं धार्मिक विधियों के साथ सम्पन्न कराया गया। विवाह कार्यक्रम पूरी गरिमा, अनुशासन और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्कार में सहयोग प्रदान करना तथा समाज में सामाजिक समरसता और एकता को प्रोत्साहित करना था।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए कोलकाता और हावड़ा से आए लगभग 125 स्वयंसेवक एवं अतिथि, साथ ही नलहाटी एवं आसपास के इलाकों के बड़ी संख्या में स्थानीय स्वयंसेवक दिनभर सक्रिय रहे। स्वयंसेवकों ने विवाह की व्यवस्थाओं, अतिथि सत्कार, भोजन, सुरक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग छह हजार आदिवासी अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक संस्कृति, सामुदायिक भाईचारे और उल्लासपूर्ण वातावरण देखने को मिला। विवाह मंडपों से लेकर अतिथियों के स्वागत तक हर स्तर पर अनुशासन और समर्पण की झलक दिखी।
कल्याण आश्रम के अधिकारी सुशील सोरेन ने बताया, ‘जनजाति समुदाय में कई जोड़े आर्थिक तंगी के कारण रीति-रिवाजों के साथ शादियां नहीं कर पाते हैं। हालांकि उन्हें एक जोड़े के रूप में जाना जाता है और उनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, लेकिन उन्हें समाज द्वारा मान्यता नहीं दी जाती है क्योंकि उन्होंने विवाह को पवित्र नहीं किया है।’
सोरेन ने कहा, ‘इस कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता उन व्यक्तियों द्वारा प्रदान की गई थी जिन्होंने इसे अपने जीवन की कुछ घटनाओं का जश्न मनाने का एक तरीका सोचा था। हमने पाया कि उनमें से कुछ ने अपने विवाह समारोह – उत्सव के लिए रखे गए पैसे इस आयोजन में लगा दिए।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों और स्थानीय निवासियों ने पूर्वांचल कल्याण आश्रम की इस पहल की खुले दिल से सराहना की। लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देते हैं, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
