जयपुर, 10 मार्च (हि.स.)। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा अगस्त 2023 में कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे।

वन राज्य मंत्री ने बताया कि कुंभलगढ़ वाइल्डलाइफ सेंचुरी और टाडगढ़-रावली वाइल्डलाइफ सेंचुरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो नए सफारी मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें कालीघाट से भीलभेरी और फुलास से गोरम घाट तक सफारी मार्ग शामिल हैं। वर्तमान में कुंभलगढ़ अभयारण्य में बीड़ की भागल से आरेट का फाटक तथा रणकपुर से मुछाला महावीर-घाणेराव तक दो सफारी मार्ग संचालित हैं। इसी तरह टॉडगढ़-रावली अभयारण्य में प्लेनी से मोडिया रावली और गोमथड़ा से गोरम घाट तक दो सफारी मार्ग मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य द्वारा पैंथर सफारी के लिए नया मार्ग सुझाया जाता है तो उसका परीक्षण कर भविष्य में वहां भी सफारी गेट खोलने का प्रयास किया जाएगा।
मंत्री यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान विधायक हरीसिंह रावत द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में दे रहे थे।
मंत्री ने बताया कि कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के गठन को लेकर एनटीसीए की तकनीकी समिति की बैठक 4 अगस्त 2023 को हुई थी, जिसके बाद 24 अगस्त 2023 को बाघ परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। इसके बाद क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और बफर क्षेत्र के चिह्निकरण के लिए 24 जुलाई 2024 को 11 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई, जिसने 24 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट पर 23 जून 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक में चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि 11 अक्टूबर 2025 को एक्सपर्ट कमेटी के अनुमोदन के बाद टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र सरकार और एनटीसीए की आपत्तियों के समाधान के बाद 24 फरवरी 2026 को जवाब दोबारा एनटीसीए को भेजा गया है। एनटीसीए ने प्रस्तावित टाइगर रिजर्व की चौड़ाई बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके लिए रासमंद, पाली और ब्यावर जिलों में भूमि चिन्हित कर ली गई है।
वन विभाग ने इन जमीनों को अपने नाम स्थानांतरित करने के लिए राजस्व विभाग को पत्र भी लिखा है।
मंत्री ने बताया कि अभी टाइगर रिजर्व औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है, इसलिए क्षेत्र में पर्यटन वृद्धि का अनुमान फिलहाल नहीं लगाया गया है। साथ ही उन्होंने पिछले दो वर्षों में प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं और पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का विवरण भी सदन के पटल पर रखा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
