शिमला, 12 मार्च (हि.स.)। ऊना जिले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शुक्रवार को प्रस्तावित एक दिवसीय दौरे से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने राज्य सरकार पर कुटलैहड़ क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का ऊना आना स्वागत योग्य है, लेकिन उनके कई बार क्षेत्र में आने के बावजूद कुटलैहड़ को कोई ठोस लाभ नहीं मिला है।

वीरेंद्र कंवर ने गुरूवार को कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों से कुटलैहड़ क्षेत्र में विकास की रफ्तार लगभग ठप हो गई है। उनके मुताबिक पिछली भाजपा सरकार के समय जो विकास कार्य शुरू किए गए थे, वे भी अब अधूरे पड़े हैं और कई योजनाएं बीच में ही रुक गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों और उदासीन रवैये के कारण क्षेत्र के लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
कंवर ने तंज कसते हुए कहा कि अब लोगों को इस सरकार से कुटलैहड़ के लिए किसी नई परियोजना की उम्मीद भी नहीं रही है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा जताई कि कम से कम पिछली सरकार के समय शुरू किए गए जनहित के विकास कार्यों को पूरा करवाया जाए और जनता की सुविधा के लिए खोले गए सरकारी कार्यालयों को दोबारा शुरू किया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। उनके अनुसार थाना कलां और बंगाणा अस्पताल से जुड़े काम, बंगाणा स्कूल की साइंस लैब, कॉलेज का इंडोर स्टेडियम, शिवा प्रोजेक्ट, पर्यटन विकास से जुड़ी योजनाएं, अटल आदर्श विद्यालय, आजीविका भवन, बसाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डेयरी, गोकुल ग्राम थानाकलां और बरनोह में मुर्राह प्रजनन फार्म जैसे कई प्रोजेक्ट ठप पड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में वेटनरी सुविधाओं में भी काफी कटौती हुई है।
कंवर ने आरोप लगाया कि कई सरकारी संस्थान भी बंद कर दिए गए हैं, जिनमें थाना कलां में बिजली विभाग का कार्यालय, कृषि मृदा संरक्षण डिवीजन, बसाल का एसएमएस कार्यालय, बीहडू कानूनगो सर्कल और प्रोइयाँ, बल्ह और क्यारियाँ के पटवारखाने शामिल हैं। उनके अनुसार कई वेटनरी अस्पताल और उपकेंद्र भी बंद हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा है। उनके मुताबिक क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और कई स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद पड़े हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ भी अनावश्यक उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऊना दौरे के दौरान वे कुटलैहड़ क्षेत्र की स्थिति पर संज्ञान लें और अधूरे पड़े विकास कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दें। साथ ही बंद किए गए सरकारी संस्थानों को फिर से बहाल किया जाए, जिससे क्षेत्र की जनता को राहत मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
