धनबाद, 16 अप्रैल (हि.स.)। जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में सड़क धंसने, गैस रिसाव और भू-धंसान की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। गुरुवार को उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार और बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने संयुक्त रूप से घटना स्थल का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने स्थिति को बेहद भयावह बताते हुए स्थानीय लोगों से तुरंत बेलगड़िया में शिफ्ट होने की अपील की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क पर धरती धसने और आसपास के प्रभावित इलाकों का बारीकी से अध्ययन किया। उपायुक्त ने बताया कि सड़क के नीचे बिछी पाइपलाइन को डायवर्ट करने के लिए माडा को निर्देश दिधा गया है। इसके लिए जल्द रूट प्लानिंग तैयार कर पाइपलाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा, क्योंकि इसी पाइपलाइन के जरिए बड़ी आबादी तक पेयजल आपूर्ति होती है।
उन्होंने कहा कि केंदुआडीह क्षेत्र पहले से ही अग्नि प्रभावित इलाका रहा है और अब गैस रिसाव व लगातार हो रहे भू-धंसान ने हालात को और गंभीर बना दिया है। बीसीसीएल भी पहले ही इस क्षेत्र को उच्च जोखिम वाला घोषित कर चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रभावित लोगों को किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति में नहीं रहना चाहिए बेलगड़िया में पुनर्वास ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेलगड़िया में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। टेक्सटाइल इंडस्ट्री स्थापित करने की दिशा में पहल चल रही है, ताकि विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार मिल सके।
उपायुक्त ने कहा कि पूर्व के सर्वे में केंदुआडीह क्षेत्र से 535 परिवारों को शिफ्ट करने की सूची बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ आबादी बढ़ने से कई परिवार इस सूची से बाहर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों को भी पुनर्वास और मुआवजा देने के लिए अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।
वहीं बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि केन्दुआडीह क्षेत्र के लोगों के पास अब बेलगड़िया शिफ्ट होना ही एकमात्र विकल्प बच गया है। उन्होंने कहा कि बेलगड़िया में अच्छी व्यवस्था दी जा रही है। सीएसआर फंड के तहत ई-रिक्शा दिए गए हैं, कौशल विकास केंद्र चलाए जा रहे हैं और परिवहन के लिए बस सेवा भी शुरू की गई है।
पार्षद प्रतिनिधि गोविंदा राउत ने कहा कि यदि लोगों को उनके वर्तमान क्षेत्र के आसपास ही रोजगार के अवसर मिले तो वे आसानी से पुनर्वास के लिए तैयार हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि पुनर्वास नीति में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संशोधन किया जाए।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार झा
