मथुरा, 21 अप्रैल(हि.स.)। वृन्दावन स्थित केशवधाम द्वारा संचालित केशव वेद विद्यालय में दो दिवसीय दशम यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन उपनयन संस्कार के रूप में किया गया। वेद पाठन आरम्भ करने से पूर्व यज्ञोपवीत संस्कार परम आवश्यक है।यज्ञोपवीत संस्कार में बटुकों को वेदारम्भ संस्कार ब्रह्मदण्ड धारण कराया गया, साथ ही हवन के साथ तथा गायत्री दीक्षा के साथ संध्या बंधन का दिव्य और अद्भुत ज्ञान प्रदान कराया गया।

संत गोविन्दानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत बालकों को अवश्य कराना चाहिए। ब्राह्मण का यज्ञोपवीत 8 वर्ष में, क्षत्रिय का 11 वर्ष में एवं वैश्य का 12 वर्ष में होना चाहिए। यज्ञोपवीत का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत और शिखा दोनों ही व्यक्ति को श्रेष्ठ ऊर्जावान बनाते हैं तथा सूर्य की ऊर्जा विद्या प्रदान करती है।
मुख्य वक्ता आचार्य डॉ रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि वेद साक्षात भगवान हैं। वेद का अध्ययन बिना यज्ञोपवीत के नहीं करना चाहिए। जब यज्ञोपवीत संस्कार होने के बाद बटुक वेद अध्ययन करके यज्ञ कराते हैं। तब निश्चित ही यज्ञ सफल होता है। संध्यावंदन नित्य करने से ब्रह्मतेज प्रकट होता है एवं ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है। गायत्री साधना व्यक्ति को भौतिक जगत में साधन सम्पन्नता एवं अध्यात्म जगत में अध्यात्म ऊर्जा प्रदान करती है।
संत सत्यमित्रानंद महाराज ने कहा कि व्यक्ति का चरित्र ही उसके चित्र की पूजा कराता है। जब हम यज्ञोपवीत धारण करके अपने संस्कारों के साथ दैनिक कर्मों को करते हुए आध्यात्मिक कर्म करते हैं तो निश्चित ही हमारा जीवन सफल होता है।
ओमप्रकाश बंसल ने कहा कि केशव धाम वेद विद्यालय में विगत 10 वर्षों से यज्ञोपवीत संस्कार विधि विधान से किया जाता है। इस वर्ष 12 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार, वेदारंभ किया गया तथा वेद आदि का अध्ययन भी बच्चों को कराया जाता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता, संस्कारों और ऋषि परम्पराओं को सुरक्षित रखने के लिए बच्चों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी आवश्यक है।
इस अवसर पर विश्वनाथ गुप्ता, गंगाधर अरोड़ा, प्रधानाचार्य आचार्य रवीन्द्र शर्मा आचार्य सुधाकर द्विवेदी संदीप चतुर्वेदी आदि सहित अनेकों गणमान्य उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार
