चंडीगढ़, 16 मार्च (हि.स.)। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पंजाब विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन सोमवार को राज्य की जेलों में लगातार कैदियों की संख्या बढ़ने से संबंधित रिपोर्ट रखी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022-23 तक राज्य की जेलों में क्षमता से हजारों अधिक कैदी रखे गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020-21 में पुरुष कैदियों की क्षमता 21,790 थी, जबकि 20,476 कैदी बंद थे। 2021-22 में यह संख्या क्षमता से बढक़र 24,101 हो गई और 2022-23 में यह बढक़र 28,481 तक पहुंच गई। यानी 2022-23 में पुरुष कैदियों की संख्या क्षमता से 4,823 अधिक थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पंजाब की जेलों में महिला कैदियों के मामले में भी स्थिति बेहतर नहीं है। 2020-21 में महिला कैदियों की क्षमता 1,408 थी और 1,240 कैदी बंद थे। 2021-22 में 1,285 और 2022-23 में 1,488 महिला कैदी जेलों में बंद पाए गए।
सीएजी ने अपनी जांच में पाया कि कई जेलों में खाली स्थान होने के बावजूद भीड़ कम करने के लिए कैदियों का पर्याप्त स्थानांतरण नहीं किया गया। 31 मार्च 2023 तक 6,204 पुरुष कैदी ऐसे जेलों में बंद थे, जहां क्षमता से अधिक भीड़ थी, जबकि दूसरी जेलों में खाली स्थान उपलब्ध था। रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2023 के बीच 17,916 कैदियों का स्थानांतरण किया गया, लेकिन भीड़ कम करने के लिहाज से यह पर्याप्त नहीं था। सीएजी ने यह भी कहा कि जेलों में बढ़ती भीड़ के कारण कैदियों को रहने, साफ-सफाई, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।
सरकार ने रिपोर्ट पर जवाब देते हुए कहा कि नई जेलों के निर्माण और पुराने जेल परिसरों के विस्तार की प्रक्रिया जारी है। लुधियाना में नई हाई सिक्योरिटी जेल और मोहाली में जिला जेल बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा कई जेलों में अतिरिक्त बैरक भी बनाए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
