खूंटी, 28 फरवरी (हि.स.)। खूंटी में नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भले ही प्रत्यक्ष मतदान से संपन्न हो चुका हो, लेकिन उपाध्यक्ष पद का चयन अप्रत्यक्ष प्रणाली से किए जाने को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड पार्षदों द्वारा उपाध्यक्ष का चयन किए जाने की प्रक्रिया से खरीद-फरोख्त की आशंका बढ़ सकती है।

शहर के वार्ड संख्या 07 के पार्षद अनुप साहु ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए जनता ने सीधे मतदान कर अपनी पसंद स्पष्ट कर दी है, जबकि उपाध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित वार्ड पार्षदों के मतों से होगा। ऐसे में उपाध्यक्ष पद के दावेदारों को आधे से अधिक पार्षदों का समर्थन जुटाना अनिवार्य होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समर्थन हासिल करने की प्रक्रिया में “साम, दाम, दंड, भेद” जैसी रणनीतियों के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वार्ड संख्या 18 के पार्षद गांगु टुटी का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और नैतिक मूल्यों पर आधारित नहीं रही, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा प्रभावित हो सकती है।
कुछ नागरिकों ने भी यह सुझाव दिया है कि उपाध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष मतदान से कराया जाना चाहिए, ताकि जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके और किसी प्रकार की सौदेबाजी की आशंका समाप्त हो।
वहीं वार्ड संख्या 11 के पार्षद संदीप स्मिथ होरो ने भरोसा जताया कि उपाध्यक्ष का चयन पूरी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्णय नगर पंचायत के विकास कार्यों को गति देने और मजबूत नेतृत्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया जाएगा।
फिलहाल नगर पंचायत की राजनीति में हलचल तेज है और सभी की नजरें वार्ड पार्षदों की आगामी बैठक पर टिकी हुई हैं, जहां उपाध्यक्ष पद को लेकर अंतिम फैसला होगा। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि चुनाव स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न होगा।
उल्लेखनीय है कि खूंटी नगर पंचायत में कुल 19 वार्ड हैं और उपाध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 10 वार्ड पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। 19 पार्षदों में से फिलहाल पांच पार्षद उपाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।
इस संबंध में नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष ओमप्रकाश कश्यप ने बताया कि वर्ष 2013 और 2018 के नगर पंचायत चुनाव में उपाध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से कराया गया था, लेकिन इस बार इसे अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने को लेकर लोगों में सवाल उठ रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
