मेदिनीपुर, 12 मार्च (हि. स.)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान का असर अब बंगाल के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर भी दिखने लगा है। पूर्व मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक शक्तिपीठ वर्गभीमा मंदिर में रसोई गैस की भारी किल्लत के कारण आगामी 21 मार्च से श्रद्धालुओं के लिए ‘भोग सेवा’ और प्रसाद वितरण को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।

बुधवार देर शाम मंदिर प्रबंधन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा के बाद अंततः यह कड़ा फैसला ले लिया गया।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ समय से व्यावसायिक गैस (कमर्शियल गैस) की आपूर्ति अत्यंत सीमित हो गई है। बाजार में सिलेंडरों की अनुपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय कारणों से बढ़ी कीमतों के चलते प्रतिदिन सैकड़ों भक्तों के लिए भोग तैयार करना अब संभव नहीं रह गया है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जिन श्रद्धालुओं ने आगामी तिथियों के लिए भोग या विशेष प्रसाद की अग्रिम बुकिंग कराई थी, उन्हें फोन के माध्यम से सूचित किया जा रहा है। उनकी बुकिंग रद्द कर दी गई है और जमा राशि वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से इस विषम परिस्थिति में सहयोग की अपील की है। गुरुवार से ही भोग वितरण में थोड़ा कसाव की स्थिति लागू कर दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि तमलुक स्थित वर्गभीमा मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और माता का प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं। अचानक भोग सेवा बंद होने की घोषणा से श्रद्धालुओं में भारी निराशा है।
स्थानीय भक्तों और नागरिक समाज ने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
भक्तों का कहना है कि गैस संकट को देखते हुए मंदिर जैसे संवेदनशील संस्थानों के लिए गैस का विशेष कोटा या वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि सदियों पुरानी परंपरा और सेवा निर्बाध रूप से चलती रहे।
मंदिर प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी और बाजार में स्थिरता आएगी, भोग सेवा को पुनः पूरी भव्यता के साथ प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
