मीरजापुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। वैशाख प्रतिपदा पर शुक्रवार को विंध्याचल धाम में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जगत जननी मां विंध्यवासिनी के वार्षिक घट जलाभिषेक में हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। “जय मां विंध्यवासिनी” के गगनभेदी जयघोष से पूरा धाम गुंजायमान हो उठा।

भोर में मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ, जिसे सुबह 10 बजे घटाभिषेक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद श्रद्धालु पक्का घाट से गंगाजल घड़ों में भरकर कंधों पर उठाए मंदिर पहुंचे। मिट्टी, तांबे और पीतल के घड़ों में जल भरकर भक्तों ने विधि-विधान से मंदिर परिसर, गर्भगृह, परिक्रमा पथ और छत की धुलाई की।
इस दौरान मां अष्टभुजी और मां महाकाली मंदिरों का भी श्रद्धा के साथ जलाभिषेक किया गया। तेज धूप के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। विंध्य नगरी की गलियां गंगाजल से भरे घड़े लेकर जा रहे भक्तों से पट गईं। श्रद्धालुओं ने पहले गंगा स्नान कर घड़ों में जल भरा, उस पर स्वास्तिक व माता का नाम अंकित किया और फूल-माला, कलावा बांधकर देवी दरबार पहुंचे। किसी ने एक तो किसी ने इक्कीस घड़ों तक जलाभिषेक कर अपनी आस्था प्रकट की। दोपहर 12 बजे तक चले इस अनुष्ठान के बाद राजश्री आरती और मां के भव्य श्रृंगार के पश्चात मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी और मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में रत्नाकर मिश्र सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय व दूरदराज के श्रद्धालु शामिल रहे। पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि वार्षिक कार्यक्रम के तहत देर रात तक विशेष पूजन-अनुष्ठान भी आयोजित किए जाएंगे। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
——————-
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
