देहरादून, 13 अप्रैल (हि.स.)। चारधाम यात्रा 2026 को इस बार केवल आस्था का नहीं, बल्कि सुरक्षा और सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर यात्रा को उच्च जोखिम वाला मिशन मानते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को केंद्र में रखा गया है। रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में 47 स्थायी स्वास्थ्य इकाइयों को सशक्त किया गया है, जबकि 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट सक्रिय कर दी गई हैं। लक्ष्य है कि कठिन पहाड़ी मार्गों पर भी हर श्रद्धालु को तत्काल उपचार उपलब्ध हो सके।

सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही स्वास्थ्य जांच की मजबूत व्यवस्था लागू की गई है। देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 57 स्क्रीनिंग कियोस्क स्थापित किए गए हैं, जहां हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और शुगर जैसी बीमारियों की जांच कर यात्रियों को समय रहते सलाह दी जा रही है। यात्रा के सबसे कठिन पड़ावों केदारनाथ और बद्रीनाथ में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। केदारनाथ में 17 बेड का अस्पताल संचालित हो रहा है, जबकि बद्रीनाथ में 50 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल जून तक शुरू होने जा रहा है, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज मिल सकेगा।
यात्रा मार्ग पर 25 विशेषज्ञ डॉक्टर, 178 मेडिकल अधिकारी और 414 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त स्टाफ भी रोस्टर के आधार पर जोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों में फिजिशियन, ऑर्थोपेडिशियन, एनेस्थेटिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट शामिल हैं। दून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही होटल, धर्मशाला संचालकों और खच्चर चालकों को भी आपात स्थितियों और हाई रिस्क संकेतों के प्रति जागरूक किया गया है, ताकि समय रहते मदद मिल सके।
यात्रा मार्ग पर 177 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। साथ ही हेलीकॉप्टर रेस्क्यू की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। यूकाडा के समन्वय से हेली रेस्क्यू और एम्स ऋषिकेश की ओर से हेली एम्बुलेंस सेवा संचालित की जाएगी, जिससे गंभीर मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 13 भाषाओं में हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई है। प्रमुख स्थानों पर ‘क्या करें और क्या न करें’ से जुड़े बोर्ड और पंपलेट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 112, 108 और 104 हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। 104 हेल्पलाइन के जरिए हाई रिस्क यात्रियों की लगातार निगरानी भी की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि चारधाम यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा दायित्व है। इस बार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को नए स्तर पर ले जाया गया है और लक्ष्य है कि कोई भी श्रद्धालु इलाज के अभाव में परेशान न हो। स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि स्क्रीनिंग से लेकर अस्पतालों तक हर स्तर पर व्यवस्थाएं सुदृढ़ की गई हैं। फोकस केवल इलाज पर नहीं, बल्कि रोकथाम और समय पर हस्तक्षेप पर भी है। चारधाम यात्रा 2026 इस बार आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन का भी नया मानक स्थापित करने जा रही है, जहां श्रद्धालुओं को हर कदम पर भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
