जम्मू, 09 फ़रवरी (हि.स.)।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने सोमवार को विधानसभा को सूचित किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) के सहायक कर्मचारियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 3,800 कर्मचारी वर्तमान में पूरी तरह से संविदा और अस्थायी आधार पर कार्यरत हैं। यह जानकारी ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के प्रभारी मंत्री ने विधायक मीर मोहम्मद फैयाज द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सरकार के अनुसार जम्मू-कश्मीर में लगभग 3,800 एमजीएनआरईजीए सहायक कर्मचारी कार्यरत हैं और उनकी प्रारंभिक संविदात्मक नियुक्तियों के बाद से उनके मानदेय में समय-समय पर संशोधन किया गया है। कर्मचारियों की भूमिका का विस्तार से वर्णन करते हुए मंत्रालय ने कहा कि एमजीएनआरईजीए कर्मचारी विभिन्न स्तरों – पंचायत, ब्लॉक, जिला, मंडल और केंद्र शासित प्रदेश – पर तैनात हैं और ग्रामीण रोजगार योजना के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियमितीकरण के प्रश्न पर सरकार ने दोहराया कि केंद्र प्रायोजित एमजीएनआरईजीए योजना के तहत सभी सहायक कर्मचारी संविदात्मक आधार पर कार्यरत हैं। यह एक अस्थायी, संविदात्मक आधार पर होगा जो केवल अनुबंध अवधि या योजना की अवधि जो भी पहले समाप्त हो के लिए वैध होगा। इसमें आगे कहा गया है कि उनकी नियुक्ति किसी स्वीकृत रिक्ति के विरुद्ध नहीं है। जवाब में कहा, “वर्तमान में एमजीएनआरईजीए के तहत कार्यरत कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं है।”
हालांकि विभाग ने बताया कि सहायक कर्मचारियों के मानदेय में समय-समय पर वृद्धि की गई है जिसका नवीनतम संशोधन सरकारी आदेश संख्या 49-आरडी एंड पीआर दिनांक 30 जनवरी, 2024 के तहत जारी किया गया है। संशोधित मासिक मानदेय: जीआरएस: 6,806 रुपये → 10,209 रुपये, तकनीकी सहायक: 11,000 रुपये → 16,500 रुपये, एमआईएस ऑपरेटर: 11,000 रुपये → 13,200 रुपये और प्रशासनिक/लेखा सहायक: 6,806 रुपये → 10,209 रुपये।
सरकार ने आगे कहा कि मानदेय में किसी भी भविष्य की वृद्धि पर राज्य रोजगार गारंटी परिषद (एसईजीसी) की आगामी बैठकों में विचार किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता
