कोलकाता, 23 फ़रवरी (हि. स.)। जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दो छात्र गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में दो शिक्षकों और कई छात्रों के घायल होने के बाद सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए जांच समिति गठित करने की घोषणा की।

विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने बताया कि 20 फरवरी को हुई घटना की जांच के लिए एक समिति बनाई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आश्वासन दिया।

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम ‘मेडगाला’ नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान एसएफआई और वी द इंडिपेंडेंट (डब्ल्यूटीआई) समर्थक छात्रों के बीच टकराव हुआ। बताया गया है कि यह विवाद विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतभेद से जुड़ा था। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब साइंस और आर्ट्स भवन के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए। करीब 12 से 15 शिक्षकों ने बीच-बचाव कर शुरुआत में दोनों पक्षों को अलग कर दिया।
हालांकि, जब प्रोफेसर राज्येश्वर सिन्हा और ललित महाकुड दोनों गुटों को शांत कराने आगे बढ़े, तो उन पर कथित तौर पर हमला कर दिया गया। हमले में एक शिक्षक का चश्मा टूट गया। प्रोफेसर सिन्हा की आंख के पास चोट लगी, जबकि प्रोफेसर महाकुड को प्राथमिक उपचार दिया गया। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
इस घटना की निंदा करते हुए कुलपति ने कहा कि शिक्षकों पर शारीरिक हमला “पूरी तरह अस्वीकार्य” है और यह विश्वविद्यालय की सम्मान, संवाद और शिक्षक-छात्र संबंधों की परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि एक ही विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शिक्षकों पर शारीरिक हमला निंदनीय, अस्वीकार्य और अकल्पनीय है।
प्रशासन ने छात्रों से संयम बरतने, उकसावे से बचने और शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक शैक्षणिक प्रक्रियाओं के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने की अपील की है। कुलपति ने विश्वविद्यालय की बौद्धिक स्वतंत्रता और रचनात्मक बहस की विरासत को बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से सहयोग का आह्वान किया।
इस बीच, जादवपुर विश्वविद्यालय टीचर्स’ एसोसिएशन (जुटा) ने शिक्षकों पर हमले और “परिसर के शैक्षणिक माहौल में गिरावट” के विरोध में आपात सामान्य बैठक बुलाई। जुटा अध्यक्ष पार्थ प्रतिम बिस्वास और महासचिव पार्थ प्रतिम रॉय ने विश्वविद्यालय की खराब वित्तीय स्थिति और शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी पर चिंता जताई।
रॉय ने आरोप लगाया कि कुछ छात्र और बाहरी तत्व मिलकर परिसर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में कुछ छात्रों ने सुरक्षा कर्मियों को शराब और गांजा सेवन रोकने पर रात में घेरकर परेशान किया।
जुटा ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान चार-पांच छात्र और बाहरी लोग विश्वविद्यालय की एंबुलेंस से मौके पर पहुंचे और झड़प में शामिल हुए। संगठन के अनुसार, एक व्यक्ति ने प्रोफेसर सिन्हा के चेहरे पर बार-बार मुक्का मारा, जिससे वह गिर पड़े और उनका चश्मा टूट गया।
पुलिस ने पुष्टि की कि उन्हें परिसर में अशांति की सूचना मिली थी, लेकिन किसी भी तरह की औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। कोलकाता पुलिस के दक्षिण उपनगरीय डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय या किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत नहीं मिलने के कारण पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन की अनुमति या अनुरोध के बिना पुलिस परिसर में प्रवेश नहीं कर सकती।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
