नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। कभी ऐसा समय था जब लोगों ने उनके माता-पिता को सलाह दी थी कि उन्हें कहीं दूर भेज दिया जाए। उनके हाव-भाव का मज़ाक उड़ाया गया, भविष्य पर सवाल उठाए गए और उनकी क्षमता को शुरुआत में ही खारिज कर दिया गया। लेकिन आज वही दीप्ति जीवनजी देश के लिए पदक जीतने की दौड़ में हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वुमन ऑफ द ईयर अवॉर्ड्स 2025 से पहले दीप्ति ने एक साक्षात्कार में अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि वह तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेड़ा गांव में स्कूल के दिनों में नंगे पांव दौड़ा करती थीं। उनके लिए दौड़ना कोई रणनीति नहीं बल्कि स्वाभाविक प्रवृत्ति थी। किसी ने नहीं सोचा था कि स्कूल के मैदान में दौड़ने वाली यह लड़की एक दिन टी20 400 मीटर स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

कम उम्र में बौद्धिक दिव्यांगता (इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटी) का पता चलने के बाद दीप्ति को समाज की फुसफुसाहटों और तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन जहां कई परिवार ऐसे दबाव में टूट जाते हैं, वहीं उनके माता-पिता ने हार नहीं मानी। दीप्ति कहती हैं, “अगर मेरे माता-पिता लोगों की बात सुन लेते, तो मैं आज यहां नहीं होती। उन्होंने डर नहीं, बल्कि प्यार चुना।”
उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट तब आया जब स्कूल के एक शारीरिक प्रशिक्षक ने उनकी रफ्तार को पहचाना। इसके बाद परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद उन्हें हैदराबाद में पेशेवर प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया। दीप्ति याद करती हैं, “जब मैं पहली बार हवाई जहाज में बैठी तो रो पड़ी थी। कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी मुझे यहां तक ले आएगी।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक और सम्मान मिलने के साथ समाज का नजरिया भी बदला। अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करना उनके लिए सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि एक मजबूत संदेश था। वह कहती हैं, “जिन लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया, आज वही मेरा स्वागत करते हैं। तानों का जवाब शब्दों से नहीं, मेहनत से देना चाहिए।”
22 वर्ष की दीप्ति के सपने अब स्पष्ट हैं। वह पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं, एक घर बनाना चाहती हैं जिसमें अपने पदकों के लिए खास कमरा हो और पुलिस अधिकारी बनने का सपना भी देखती हैं।
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्स वुमन ऑफ द ईयर अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन 16 फरवरी को नई दिल्ली में होगा। इस वर्ष के नामांकित खिलाड़ियों में दिव्या देशमुख (शतरंज), हरमनप्रीत कौर (क्रिकेट), स्मृति मंधाना (क्रिकेट), सुरुचि सिंह (निशानेबाजी) और ज्योति याराजी (एथलेटिक्स) शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे
