जींद, 13 मार्च (हि.स.)। जिले के बडौदा गांव में सर्वाइकल कैंसर की एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर ग्राम पंचायत ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी स्कूलों और उप स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर अधिकारियों व कर्मचारियों से इस विषय पर विस्तृत चर्चा की। पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि गांव में बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जानी है तो संबंधित विभाग को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए लिखित हलफनामा देना होगा।

सरपंच रेशम लाल, भूतपूर्व सरपंच सुधीर चहल, संदीप चहल ने शुक्रवार को कहा कि यह एफिडेविट स्कूल के प्रिंसिपल, वैक्सीन लगाने वाले डॉक्टर या सरकार की ओर से दिया जाना चाहिए। जिसमें यह स्पष्ट हो कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार का स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव सामने आता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग या अधिकारी की होगी। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक इस विषय में लिखित जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तब तक गांव में एक भी बच्ची को यह टीका नहीं लगाने दिया जाएगा। उनका कहना था कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। पंचायत सदस्यों ने यह भी कहा कि टीकाकरण से पहले अभिभावकों को वैक्सीन के लाभ, संभावित साइड इफेक्ट और पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जानी चाहिए। बिना अभिभावकों की सहमति और पूरी जानकारी के किसी भी बच्चे को टीका लगाना उचित नहीं है।
प्रतिनिधि सदस्यों द्वारा पिछले कुछ प्रकरणों का हवाला भी दिया गया कि किस प्रकार 2011 में 14 हजार बच्चियों पर वैक्सीनेशन ट्रायल किया गया जिसके बाद कुछ बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई ओर बहुत केसों में इसके दुष्प्रभाव देखने को मिले। इसमें गर्भाशय संबंधित मुख्य था। पंचायत प्रतिनिधियों ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि इस तरह के टीकाकरण अभियानों को लेकर ग्रामीणों में कई सवाल और आशंकाएं हैं। उनका कहना था कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावित करने में बड़ी संस्थाओं और दवा कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रतिनिधियों ने इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और बड़ी दवा कंपनियों के प्रभाव वाला मॉडल बताते हुए कहा कि कई बार ऐसे अभियानों के पीछे फार्मा उद्योग के आर्थिक हित भी जुड़े होते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा
