-23 मार्च को कुरुक्षेत्र में होगी किसान-मजदूर जन क्रांति रैली

-भारत-अमेरिका व्यापार
समझौता तीन कृषि कानूनों से भी खतरनाक
चंडीगढ़, 19 मार्च (हि.स.)। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन ने 23 मार्च को शहीदी दिवस
के अवसर पर कुरुक्षेत्र में रैली करने का ऐलान किया है।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष
गुरनाम सिंह चढूनी ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि छोटे किसान बड़े अमेरिकी किसानों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में नहीं
टिक पाएंगे, जिससे देश कि खेती
की स्थिति गंभीर संकट में पड़ सकती है।
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा
कि डेयरी क्षेत्र,
खाद्य सुरक्षा,
एमएसपी नीति और सरकारी खरीद प्रणाली जैसी नीतियों पर
अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सस्ते आयात से स्थानीय बाजार पर असर अमेरिका में किसानों को
बड़ी सब्सिडी मिलने के कारण उनके उत्पाद जैसे गेहूं,
मक्का, सोयाबीन और डेयरी उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं। इससे
भारतीय किसान को कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ेगी और स्थानीय बाजार पर प्रतिकूल
असर पड़ेगा।
डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव भारत का डेयरी
सेक्टर करीब 8 करोड़ परिवारों से
जुड़ा हुआ है। अमेरिका से डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ने से भारतीय डेयरी उत्पादकों
को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा,
जिससे उनका व्यापार प्रभावित हो सकता है। बीज
और कृषि कंपनियों पर नियंत्रण इस व्यापार समझौते के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों का
कृषि क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ सकता है।
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि ट्रेड डील तीन
कृषि कानूनों से भी ज़्यादा खतरनाक हो सकती है अगर अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते में
खेती को खोल दिया गया, तो
उसे वापस लेना आसान नहीं होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय ट्रेड एग्रीमेंट हो गया तो उसे
बदलना मुश्किल होता है। चढूनी ने कहा कि यह डील भारत के छोटे किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए खतरनाक साबित
हो सकती है। इसका तत्काल रद्द होना आवश्यक है। देश की आम जनता को शिक्षा और
चिकित्सा सेवाओं की लूट से बचाने के लिए इन्हें मुफ्त किया जाए। किसानों को
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने की कानूनी गारंटी दी जाए और उनका कर्ज माफ किया जाए।
गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि भारतीय किसानों और
आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी
है। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा की अगर सरकार द्वारा उक्त मांगे नहीं मानी गई तो 23
मार्च को अनाज कुरुक्षेत्र में होने वाली किसान
मजदूर जन क्रान्ति रैली में
किसी भी प्रकार का कठोर फैसला लिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
