मुंबई, 10फरवरी ( हि.स) । हमेशा यह हिदायत दी जाती है कि अगर कोई जानवर काट ले, तो बचाव के इलाज के लिए तुरंत अस्पताल जाना ज़रूरी है। लेकिन, असलियत यह है कि ठाणे जिले में कुत्ते के काटने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक एक साल के समय में, जिले के सरकारी अस्पतालों में 67 हज़ार 112 लोगों को रेबीज़ का टीका लगवाना पड़ा है।

आंकड़े बताते हैं कि जिले के शहरी और घनी आबादी वाले इलाकों में कुत्ते के काटने के मामले ज़्यादा हैं। उल्हासनगर-3 में सबसे ज़्यादा 12,594 मरीज़ हैं, जबकि भिवंडी उपजिला अस्पताल में 11,793, उल्हासनगर-4 में 9,788 और अंबरनाथ उपजिला अस्पताल में 8,450 मरीज़ हैं। ठाणे सिविल अस्पताल में 5,157 मरीज़ों को रेबीज़ का बचाव का इलाज दिया गया।

विशेषज्ञ के मुताबिक, रेबीज़, अगर बीमारी गंभीर हो जाए तो जानलेवा हो सकती है। इसलिए, अगर कोई कुत्ता या कोई संदिग्ध जानवर आपको काट ले, तो घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से धोना और बिना देर किए वैक्सीन लगवाना ज़रूरी है। कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों ने ठाणे जिले में पब्लिक हेल्थ सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ठाणे जिला सिविल अस्पताल के सर्जन डॉ कैलाश पवार बतलाते हैं कि रेबीज़ से खुद को बचाने का सबसे असरदार तरीका जागरूकता है। खासकर छोटे बच्चों पर ध्यान देना ज़रूरी है, क्योंकि अक्सर बच्चे डर के मारे अपने माता-पिता को यह नहीं बताते कि उन्हें कुत्ते ने काटा है। हमारी रोकथाम के लिए, आवारा कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन और नागरिकों की जागरूकता, ये सभी समान रूप से ज़रूरी हैं। ठाणे जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में रेबीज़ वैक्सीन का काफ़ी स्टॉक मौजूद है और नागरिकों को अफवाहों पर विश्वास किए बिना तुरंत और समय पर इलाज करवाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा
