शिमला, 28 जनवरी (हि.स.)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ताओं को पैकेज्ड खाद्य तेल, विशेषकर रिफाइंड और सरसों तेल की खरीद को लेकर जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

विभाग के एक प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि उपभोक्ताओं के बीच पैकेट पर लिखी मात्रा, वजन और आयतन को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, जिसे दूर करना जरूरी है।

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के अनुसार अब तेल और अन्य तरल पदार्थ किसी भी मात्रा में पैक किए जा सकते हैं। पहले खाद्य तेल केवल कुछ निर्धारित मानक मात्राओं में ही पैक किए जा सकते थे, लेकिन भारत सरकार द्वारा विधिक माप विज्ञान (डिब्बा बंद वस्तुएं) नियम, 2011 के द्वितीय खंड को निरस्त किए जाने के बाद निर्माता या पैकर को किसी भी मात्रा में तेल पैक करने की अनुमति है। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह समझना जरूरी है कि पैकेट पर लिखी मात्रा ही मान्य होती है, न कि पैकेट का आकार।
उन्होंने बताया कि हाल ही में कुछ समाचार पत्रों में उचित मूल्य की दुकानों पर कम वजन के रिफाइंड तेल को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इसके बाद प्रदेश भर में विधिक माप विज्ञान अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कई उपभोक्ता तरल पदार्थों के पैकेट या डिब्बों पर मुद्रित आयतन और वजन के अंतर को सही तरह से नहीं समझ पाते हैं। आमतौर पर तेल के पैकेट पर एक निश्चित तापमान पर आयतन, यानी मिलीलीटर या लीटर में मात्रा अंकित होती है। जहां मात्रा आयतन में घोषित की जाती है, वहां वस्तु का वजन भी बताना अनिवार्य होता है।
विभाग ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि किसी भी डिब्बा बंद वस्तु को खरीदते समय केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि उस पर दर्ज अन्य जरूरी जानकारी भी जरूर जांचें। इसमें शुद्ध मात्रा, निर्माता या पैकर का नाम और पूरा पता, पैकिंग का महीना और वर्ष, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी), उपभोक्ता शिकायत या सहायता से जुड़ी जानकारी और उपयोग करने की अंतिम तिथि शामिल है। यह सभी विवरण स्पष्ट, पढ़ने योग्य और आसानी से दिखाई देने वाले होने चाहिए।
प्रवक्ता ने कहा कि उपभोक्ताओं को तेल या अन्य तरल पदार्थ खरीदते समय पैकेट पर लिखे आयतन और वजन को ध्यान से देखने के साथ-साथ संभव हो तो वस्तु को तोल कर भी देखना चाहिए। यदि किसी पैकेट पर अनिवार्य जानकारी न हो, जानकारी अस्पष्ट हो या मात्रा अथवा कीमत को लेकर कोई संदेह हो, तो उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
इसके लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 या 1915, और मुख्यमंत्री संकल्प हेल्पलाइन 1100 पर संपर्क किया जा सकता है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, व्यापार में पारदर्शिता और कानून के सख्त पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
