कानपुर, 07 फरवरी (हि.स.)। डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग से डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों की छवि और निजी सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह बातें शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के मुख्य उप-संपादक गौरव ललित ने कही।

व्याख्यान का विषय ‘डिजिटल मीडिया में डीपफेक’ रहा, जिसमें छात्रों को डीपफेक तकनीक की कार्यप्रणाली, खतरे और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। गौरव ललित ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से किसी भी व्यक्ति का वास्तविक जैसा डिजिटल अवतार तैयार किया जा सकता है, जिससे सच और झूठ में फर्क करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि बिना जांचे किसी वीडियो, फोटो या सूचना को साझा करना गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने छात्रों को संदिग्ध फाइलें न खोलने, अनजान लिंक से बचने और सोशल मीडिया पर लोकेशन साझा न करने की सलाह दी। साथ ही मेटाडेटा और पिक्सल संरचना के जरिए फोटो और वीडियो की प्रामाणिकता जांचने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार एआई एल्गोरिदम को नहीं समझते, तो वे अनजाने में डीपफेक प्रोपेगेंडा का हिस्सा बन सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष दिवाकर अवस्थी ने कहा कि एआई के अत्यधिक उपयोग से विश्लेषण और मौलिक सोच प्रभावित हो रही है। उन्होंने छात्रों से लेखन और अध्ययन में विवेकपूर्ण तकनीकी उपयोग की अपील की। इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
