अजमेर, 11 मार्च (हि.स.)। तृतीय अजमेर थिएटर फेस्टिवल के सफल आयोजन ने शहर में रंगमंच के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। चार दिवसीय इस नाट्य महोत्सव में अजमेरवासियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से स्थानीय नाट्यकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। कलाकारों का मानना है कि यदि सरकार, जनप्रतिनिधि और समाज के समर्थ लोग संसाधनों के साथ सहयोग करें तथा जिला प्रशासन गैर-व्यावसायिक संस्थाओं को आयोजन स्थल उपलब्ध कराए, तो अजमेर फिर से देश को उत्कृष्ट रंगकर्मी दे सकता है।

महोत्सव का आयोजन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) नई दिल्ली की रेपर्टरी कंपनी और स्थानीय संस्था ‘अपना थिएटर संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में 7 से 10 मार्च तक किया गया। संयोजक योबी जॉर्ज और राजेन्द्र सिंह ने कला प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए रंगमंच से जुड़े रहने का आह्वान किया।
महोत्सव में चार नाटकों का मंचन हुआ। अंतिम दिन महाश्वेता देवी की कहानी पर आधारित नाटक “बायेन” ने अंधविश्वास के कारण महिलाओं के सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके अलावा विजयदान देथा की कहानी पर आधारित “माई री मैं का से कहूं”, मिथिलेश्वर की कहानी “बाबू जी” और धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक “अंधा युग” का मंचन भी हुआ। दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों को सराहा और माना कि डिजिटल युग में भी रंगमंच समाज की संवेदनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना हुआ है
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष
