
सुपौल, 11 अप्रैल (हि.स.)। जिले के त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित नगर परिषद डपरखा बाबा ट्रेडर्स, निकट देव फ्यूल सेंटर, मेन रोड लटूरी मंदिर के पास शनिवार को प्रांतीय महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव जी महाराज की शिष्या, पूज्या आचार्या डॉ. साध्वी देवप्रिया जी विशेष रूप से उपस्थित रहकर महिलाओं को योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी जीवनशैली पर मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम के दौरान पावन सत्संग एवं आशीर्वाद का भी आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने भाग लिया। आयोजकों ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को आध्यात्मिक, स्वस्थ एवं संस्कारित जीवन के प्रति जागरूक करना है, ताकि परिवार और समाज के समग्र विकास में उनकी भागीदारी और मजबूत हो सके। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक महिलाओं से कार्यक्रम में भाग लेकर इसका लाभ उठाने की अपील की थी।
कार्यक्रम में साध्वी देवप्रिया ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन
जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का संदेश दिया। आयोजित प्रांतीय महिला सम्मेलन में पूज्या आचार्या डॉ. साध्वी देवप्रिया जी अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से महिलाओं को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रेरित किया। उनका मुख्य जोर योग, आयुर्वेद और भारतीय सनातन परंपराओं के समन्वय के जरिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने पर रहा।
साध्वी देवप्रिया जी बताती हैं कि आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है। नियमित योगाभ्यास और प्राणायाम से न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी शांत और एकाग्र होता है। उनका मार्गदर्शन महिलाओं की भूमिका को विशेष महत्व देता है। वे मातृशक्ति को परिवार और समाज की आधारशिला मानते हुए कहती हैं कि जब महिलाएं संस्कारित और जागरूक होंगी, तभी एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने और बच्चों में अच्छे संस्कार देने की प्रेरणा देती हैं।
आयुर्वेद और स्वदेशी जीवनशैली पर जोर देते हुए साध्वी जी प्राकृतिक चिकित्सा, संतुलित आहार और देसी उत्पादों के उपयोग को अपनाने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि आधुनिक बीमारियों से बचाव के लिए प्राकृतिक जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्संग के माध्यम से वे सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति आस्था को मजबूत करने का संदेश देती हैं।
उनका कहना है कि आध्यात्मिकता का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपने जीवन में नैतिकता, करुणा और अनुशासन को अपनाना है। सम्मेलन में उनके विचार महिलाओं के लिए न केवल प्रेरणादायक रहे, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की दिशा भी प्रदान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र
