दमोह, 09 मार्च (हि.स.) मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय पर सोमवार को आगामी नेशनल लोक अदालत के आयोजन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी क्रम में 14 मार्च को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में आम नागरिकों को जानकारी देने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर से प्रचार रैली आज 09 मार्च सोमवार को निकाली गई। रैली को जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

प्रचार रैली में विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी सहित न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण और न्यायालयीन अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी, जहां लोगों को नेशनल लोक अदालत के महत्व, इसकी प्रक्रिया तथा इससे मिलने वाले त्वरित और सुलभ न्याय के बारे में जानकारी दी गई।
न्यायालय अधिकारियों ने बताया कि 14 मार्च, शनिवार को जिले में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समझौता योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण कराया जाएगा। इसके लिए जिला न्यायालय दमोह, हटा, पथरिया तथा तेंदूखेड़ा में खंडपीठों का गठन किया जा रहा है, जहां न्यायाधीशगण विभिन्न प्रकरणों में पक्षकारों के बीच समझौता कराकर विवादों का समाधान करेंगे।
न्यायालय सूत्रों के अनुसार अदालतों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित करने के उद्देश्य से समय-समय पर नेशनल लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इस बार भी दमोह जिले में पूर्व की भांति कुल 21 खंडपीठों का गठन किया जाएगा।
समझौता योग्य मामलों का होगा निपटारा
नेशनल लोक अदालत में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका समाधान आपसी सहमति के आधार पर संभव होता है। इनमें बैंक रिकवरी और ऋण संबंधी प्रकरण, बिजली और पानी के बिल से जुड़े विवाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक अनादरण (चेक बाउंस) के मामले, पति-पत्नी के पारिवारिक विवाद एवं भरण-पोषण के मामले, श्रम विवाद तथा अन्य दीवानी मामलों के समझौता योग्य प्रकरण शामिल होते हैं।
त्वरित और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास
नेशनल लोक अदालत की व्यवस्था के तहत मामलों का निराकरण सरल और त्वरित प्रक्रिया से किया जाता है। यदि किसी मामले में पहले से न्यायालय शुल्क जमा किया गया हो तो समझौते के बाद वह वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत में दिया गया निर्णय दोनों पक्षों की सहमति से होता है और उसे न्यायालय की डिक्री का दर्जा प्राप्त होता है, जिसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव
