धमतरी, 07 मार्च (हि.स.)। धमतरी जिले की सायरा बानो ने अपने हौसले और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियां भी उस व्यक्ति का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जिसके मन में आगे बढ़ने का जज़्बा हो। शारीरिक दिव्यांगता और आर्थिक तंगी के बावजूद आज सायरा बानो ई-रिक्शा चलाकर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन गई हैं।

आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले सामने आई यह कहानी महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। एक समय ऐसा था जब सायरा बानो अत्यंत गरीब परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं। रोजगार के अभाव में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और रोजगार के लिए जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। उनकी परिस्थितियों और मेहनत करने की इच्छा को देखते हुए कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने पहल करते हुए उन्हें बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था कराई।
प्रशिक्षण के दौरान सायरा बानो ने पूरी लगन से ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीखी। साथ ही उन्हें स्वरोजगार से संबंधित जरूरी जानकारी दी गई और पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों की भी जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के तहत उन्हें ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। आज सायरा बानो धमतरी शहर की सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे वे अपनी जरूरतों को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा
