
धमतरी, 10 फ़रवरी (हि.स.)। धमतरी जिले में कृषि परिदृश्य में उत्साहजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक धान की खेती के साथ अब किसान फसलचक्र परिवर्तन को अपनाते हुए दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। सरसों, चना, मक्का के साथ-साथ रागी (मंडुआ) की खेती में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह बदलाव किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी (म), भटगांव और सिरकट्टा में रागी की रोपाई का कार्य प्रगति पर है। यहां महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेतों में मेहनत कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान रबी मौसम में जिले में दलहन फसलें लगभग 18,450 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई हैं, जिनमें चना 14,200 हेक्टेयर, अरहर 2,150 हेक्टेयर और मसूर 2,100 हेक्टेयर शामिल है। तिलहन फसलों के अंतर्गत सरसों प्रमुख फसल बनकर उभरी है। जिले में तिलहन लगभग 9,600 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही है, जिसमें सरसों 8,300 हेक्टेयर में बोई गई है।

मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की दिशा में रागी की खेती जिले में नई उम्मीद बनकर सामने आई है। कम लागत, कम पानी और अधिक पोषण देने वाली इस फसल को छोटे और सीमांत किसान तेजी से अपना रहे हैं। वर्तमान में जिले में रागी लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान जुड़े हुए हैं।
कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में फसलचक्र परिवर्तन को बढ़ावा देना प्रशासन की प्राथमिकता है। दलहन, तिलहन और रागी जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक होंगी।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज और योजनाओं का लाभ देकर वैकल्पिक फसलों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले समय में धमतरी जिले को दलहन-तिलहन और मोटे अनाज उत्पादन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा
