डॉ. मयंक चतुर्वेदी

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने विश्व समुदाय को यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत अब नीति निर्धारण और वैश्विक दिशा तय करने वाला देश बन चुका है। 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी तथा 88 देशों द्वारा हस्ताक्षरित नई दिल्ली घोषणा ने भारत के मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण को जब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की, तब इसके साथ यह भी तय हो गया कि भारत अब एआई क्राति में आर्थिक, सामाजिक और नैतिक आयामों को समेटने वाला देश बनने जा रहा है।

दरअसल, नई दिल्ली घोषणा का मूल दर्शन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विचार में निहित है, जिसमें एआई को मानव कल्याण का साधन माना गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह घोषणापत्र सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की भावना से प्रेरित है। इसका उद्देश्य एआई संसाधनों और उसके लाभों को कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित रखने के बजाय पूरी मानवता तक पहुंचाना है। घोषणा में सात प्रमुख स्तंभों को आधार बनाया गया है; एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई, विज्ञान के लिए एआई, सामाजिक सशक्तिकरण, मानव पूंजी विकास तथा लचीली और ऊर्जा-कुशल प्रणालियां। यहां यह ढांचा वैश्विक सहयोग की नई संरचना प्रस्तुत करता हुआ दिखा है, जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए साझा प्रगति को प्राथमिकता दी गई है।
700 अरब डॉलर तक पूंजीगत व्यय की तैयारी
इस समिट ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया कि भारत एआई निवेश का नया वैश्विक केंद्र बन रहा है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अल्फाबेट जैसी दिग्गज कंपनियां एआई पर वैश्विक स्तर पर लगभग 700 अरब डॉलर तक पूंजीगत व्यय की तैयारी में हैं। भारत में बड़े औद्योगिक समूहों ने भी अभूतपूर्व निवेश योजनाओं की घोषणा की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लगभग 110 अरब डॉलर डेटा सेंटर और संबंधित अवसंरचना में निवेश की योजना बना रही है, जबकि अदाणी ग्रुप ने अगले दस वर्षों में 100 अरब डॉलर एआई आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए निर्धारित किए हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने इस दशक के अंत तक ग्लोबल साउथ देशों में 50 अरब डॉलर निवेश की दिशा में बढ़ने की बात कही है।
भारत की डिजिटल संप्रभुता की वैश्विक धाक
ओपनएआई और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज ने टाटा समूह के साथ मिलकर भारत में एआई क्षमताओं को मजबूत करने का संकल्प लिया है। ब्लैकस्टोन ने भारतीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी नेयसा में 600 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। एनवीडिया ने भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने की घोषणा की है। ये निवेश केवल पूंजी प्रवाह नहीं हैं; ये भारत की डिजिटल संप्रभुता, डेटा अवसंरचना और तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने की दिशा में संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत हैं।
भारत अब वैश्विक तकनीकी विमर्श का केंद्र
समिट में वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की उपस्थिति ने भारत की बढ़ती साख को और मजबूत किया। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और गूगल डीपमाइंड के डेमिस हासाबिस जैसे वैश्विक नेता इस आयोजन में शामिल हुए। निश्चित ही यह भागीदारी संकेत है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी विमर्श का केंद्र बन चुका है। अमेरिका और भारत के बीच पैक्स सिलिका समझौते ने सिलिकॉन आधारित तकनीकों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करने के सहयोग को नया आयाम दिया है। भारत द्वारा 18 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी देना इस रणनीतिक दृष्टि का आधार है।
एआई के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका समावेशी दृष्टिकोण है। यहां एआई को केवल कॉर्पोरेट लाभ का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उपकरण माना जा रहा है। इसका सबसे सशक्त उदाहरण कृषि क्षेत्र में दिखाई देता है। इस संदर्भ में मुंबई में आयोजित AI4Agri 2026 सम्मेलन को देखा जा सकता है, जिसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि भारत की अगली कृषि क्रांति एआई संचालित होगी।
इंडिया एआई मिशन, जिसका बजट 10,372 करोड़ रुपये है, स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सेट और स्टार्टअप ढांचे को मजबूत कर रहा है। भारतजन के तहत विकसित Agri Param मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में किसानों को सलाह प्रदान कर रहा है। यह भाषाई समावेशन एआई को वास्तविक अर्थों में जन-केंद्रित बनाता है। ड्रोन और उपग्रह आधारित मैपिंग से लेकर जलवायु पूर्वानुमान और जैव प्रौद्योगिकी तक, एआई का एकीकृत उपयोग कृषि को अधिक सटीक, टिकाऊ और लाभकारी बना रहा है। यदि 60 करोड़ किसानों की उत्पादकता में केवल 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो यह इस सदी का सबसे बड़ा गरीबी-निवारण अवसर सिद्ध हो सकता है, और भारत इस परिवर्तन का सह-निर्माता बन रहा है।
ओपन-सोर्स और ऊर्जा-कुशल एआई मॉडल बना भारत की ताकत
भारत की रणनीति का एक और महत्वपूर्ण आयाम ओपन-सोर्स और ऊर्जा-कुशल एआई मॉडल है। पश्चिमी देशों के बंद और पेटेंट-आधारित ढांचे के विपरीत, भारत सुलभ और पारदर्शी एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। कम लागत वाले डेटा सेंटर, ऊर्जा दक्ष अवसंरचना और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए छोटे, उद्देश्य-विशिष्ट एआई मॉडल भारत को व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं। कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में मोबाइल आधारित एआई समाधान यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
भारत की जनसंख्या संरचना भी इस परिवर्तन को गति दे रही है। 1.4 अरब की आबादी, विशाल युवा प्रतिभा-आधार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था इसे वैश्विक एआई हब बनने के लिए उपयुक्त बनाती है। आधार, यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मजबूत आधारभूत ढांचे एआई अनुप्रयोगों के लिए तैयार मंच प्रदान करते हैं। नीतिगत स्पष्टता, निवेश की बाढ़ और व्यावहारिक अनुप्रयोगों का संयोजन भारत को एक अद्वितीय स्थिति में खड़ा करता है।
भारत विश्व व्यवस्था का एक प्रमुख एआई निर्माता बनने की ओर अग्रसर
अत: इस संदर्भ में कहना यही है कि नई दिल्ली घोषणा ने आज ये संदेश दिया है कि एआई का उद्देश्य दक्षता बढ़ाने के साथ ही समानता और समावेशन सुनिश्चित करना है। निवेश प्रतिबद्धताएं भारत को अवसंरचना और नवाचार की शक्ति प्रदान कर रही हैं, जबकि कृषि जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रयोग यह सिद्ध कर रहे हैं कि एआई जमीन पर वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।
इस आधार पर यही सच प्रतीत होता है कि यदि बीती सदी औद्योगिक क्रांति की थी और वर्तमान सदी डिजिटल क्रांति की है तो आने वाला दशक एआई क्रांति का होगा। इस क्रांति की धुरी वही देश बन सकता है, जोकि तकनीक को मानव कल्याण से जोड़कर वैश्विक सहयोग का सेतु बन सके। साथ ही जिसमें नवाचार को समावेशी बनाने की क्षमता हो। कहना होगा कि आज ये संकेत स्पष्ट हैं; भारत उसी दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है और एआई के युग में विश्व व्यवस्था का एक प्रमुख निर्माता बनने की ओर अग्रसर है।
(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी
