काठमांडू, 11 फ़रवरी (हि.स.)। नेपाल सरकार ने जेन–जी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित जांच आयोग की अवधि 25 दिन बढ़ाने का निर्णय किया है। इस प्रकार से अवधि बढ़ाये जाने के कारण आयोग की रिपोर्ट 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा निर्वाचन के बाद तक के लिए टल गई है।

देश के गृहमंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता ओमप्रकाश आर्यल ने कहा, “गत 8 और 9 सितंबर को जेन जी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, पुलिस बल का अत्यधिक प्रयोग और भौतिक एवं मानवीय क्षति की यथार्थ जांच के लिए नेपाल सरकार मंत्रिपरिषद के 21 सितंबर 2025 के निर्णय के अनुसार गठित जांच आयोग की प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए तय समय-सीमा 25 दिन बढ़ाने का निर्णय किया गया है।”

सरकार का निष्कर्ष है कि चुनाव के दौरान यदि रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है और इससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। इसी आकलन के आधार पर सरकार ने रिपोर्ट चुनाव के बाद ही स्वीकार करने की रणनीति अपनाई है।
सरकार ने यह भी आशंका जताई है कि रिपोर्ट प्रस्तुत होते समय उसमें शामिल विषयवस्तु से संबंधित सूचनाएं किसी तरह लीक होकर चुनाव प्रभावित कर सकती हैं। इसी निष्कर्ष के साथ सरकार ने जांच आयोग की अवधि 25 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है।
इससे पहले बढ़ाई गई आयोग की अवधि आज बुधवार को समाप्त होने वाली थी। इसके अनुसार अब आयोग 5 मार्च के बाद ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकेगा।
प्रतिनिधि सभा निर्वाचन का मतदान संपन्न होने के बाद सुरक्षा जोखिम स्वतः कम हो जाएगा और उसके बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने से कोई समस्या नहीं होने की सलाह सलाहकारों की टीम ने प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को दी थी।
जांच आयोग के सदस्य तथा प्रवक्ता विज्ञान राज शर्मा ने बताया, “पिछले कुछ दिनों से इस बात पर चर्चा चल रही थी कि आयोग की रिपोर्ट ली जाए या कुछ समय और बढ़ाया जाए। अभी रिपोर्ट लेने पर उसे सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ सकता है और इससे चुनाव में भाग ले रही पार्टियां अपने-अपने तरीके से आक्रामक हो सकती हैं—इसी निष्कर्ष के साथ आयोग की अवधि बढ़ाने का फैसला किया गया है।”
शर्मा के अनुसार, यदि सरकार ने अवधि नहीं बढ़ाई होती तो बुधवार तक जल्दबाजी में ही सही, रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने की तैयारी थी। आयोग के अधिकारी काम के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों को संकलित कर पैकेट बनाने और सीलबंद करने की तैयारी भी कर चुके थे। लेकिन आज कैबिनेट के निर्णय के बाद अब आयोग को अगले तीन सप्ताह आराम से काम करने का अवसर मिला है।
कुछ दिन पहले नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्की, गृह मंत्री ओमप्रकाश अर्याल, आयोग के अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की सहित आयोग के सदस्य और प्रधानमंत्री के सलाहकारों के बीच कई बार चर्चा हुई थी।
प्रधानमंत्री कार्की से हालिया मुलाकात में एमाले अध्यक्ष ओली ने जांच आयोग की रिपोर्ट को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने मतदान से ठीक पहले कोई कठिन और गंभीर परिस्थिति न बनने देने का आग्रह भी किया था।
सरकार का निष्कर्ष है कि यदि रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और उसमें ओली को दोषी ठहराया गया, तो वे पूर्वाग्रह के आधार पर कार्रवाई का आरोप लगाते हुए चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठा सकते हैं, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार ने आयोग की अवधि बढ़ाकर रिपोर्ट चुनाव के बाद ही लेने का निर्णय किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास
