कोलकाता, 01 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े तार्किक विसंगति श्रेणी के मामलों की न्यायिक जांच प्रक्रिया में तेजी आई है। अब तक 78 प्रतिशत से अधिक मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि लगभग 13 लाख मामलों का निपटारा अभी बाकी है।

बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि 700 से अधिक न्यायिक अधिकारी इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं, जिनमें झारखंड और ओडिशा से आए लगभग 100-100 अधिकारी भी शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक सूत्र के अनुसार, जिस गति से जांच चल रही है, उससे उम्मीद है कि शेष प्रक्रिया भी इसी सप्ताह पूरी कर ली जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि मंगलवार रात तक जिन 47 लाख मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, उनमें से कितने नाम हटाए जाएंगे, इसकी सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं की गई है। हालांकि प्रतिदिन जिन मामलों की जांच पूरी हो रही है, उनमें औसतन लगभग 40 प्रतिशत नाम हटाए जा रहे हैं।
जिन मतदाताओं के नाम इस प्रक्रिया में हटाए जाएंगे, उन्हें इसके खिलाफ अपील करने का अधिकार होगा। इसके लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं, जहां प्रभावित मतदाता अपनी अपील दायर कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि न्यायिक जांच के लिए भेजे गए 60 लाख 675 मामलों को अलग रखते हुए राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच की प्रगति के अनुसार पूरक मतदाता सूची समय-समय पर जारी की जानी है।
इस बीच भारत निर्वाचन आयोग ने नदिया जिले के हंसखाली के प्रखंड विकास अधिकारी सायंतन भट्टाचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई चुनाव प्रशिक्षण केंद्र में हुई हिंसा की घटना के बाद की गई।
बताया गया है कि चुनाव प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एक शिक्षक और निर्वाचन अधिकारी सैकत चटर्जी के साथ कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने मारपीट की। आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान एक राजनीतिक प्रचार वीडियो चलाए जाने का विरोध करने पर उनके साथ यह घटना हुई।
निर्वाचन आयोग ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। आयोग के निर्देश पर स्थानीय थाने में प्राथमिकी भी दर्ज की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने संबंधित अधिकारी को निलंबित करने का निर्णय लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
