नवादा,17 मार्च (हि.स.)।पटना उच्च न्यायालय ने नवादा के आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए याचिकाकर्ता के मकान तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस मामले में भारतीय रेलवे को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह मामला नवादा निवासी अजय साव द्वारा दायर सिविल रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें उन्होंने अपने विरुद्ध शुरू की गई अतिक्रमण (एन्क्रोचमेंट) कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना स्पष्ट आधार के उनके मकान को रेलवे की भूमि बताते हुए उसे तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अपने सिविल क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता की शिकायत को गंभीरता से लिया। अदालत ने रेलवे प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह स्पष्ट करें कि विवादित भूमि को किस आधार पर रेलवे की संपत्ति माना गया है। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि उक्त जमीन को अतिक्रमित घोषित करने के लिए किन दस्तावेजों और प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।
न्यायालय ने विशेष रूप से यह जानना चाहा है कि क्या अतिक्रमण की कार्रवाई विधि सम्मत तरीके से की गई या नहीं। अदालत ने रेलवे को निर्देशित किया कि वे सभी संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्य के साथ विस्तृत जवाब दाखिल करें, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता राम अजय शाह के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दमनात्मक (नो कोअर्सिव) कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि फिलहाल उनके मकान को नहीं तोड़ा जा सकेगा और यथास्थिति बनी रहेगी।
इस आदेश से याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है, जबकि रेलवे प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह अपने दावे को ठोस आधार और दस्तावेजों के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
मामले में अगली सुनवाई रेलवे द्वारा रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद की जाएगी। तब तक न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अतिक्रमण की वैधता की पूरी जांच होने तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह आदेश न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐसे अन्य मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां बिना पर्याप्त जांच के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन
