धर्मशाला, 05 अप्रैल (हि.स.)। स्वयंसेवी संस्था जस्टिस फॉर देवआत्मा हिमालय के संस्थापक व समाज सेवी नाथू राम चौहान ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों के कटान का परिणाम है कि अब कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बादल फटने जैसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले पांच से छह हजार मीटर ऊंचाई की जगह पर ऐसी घटनाएं सामने आती थीं जबकि अब दो से तीन हजार मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बादलों के फटने जैसी घटनाएं हो रही हैं।

रविवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि 1905 में जिला कांगड़ा में आई भूकंप त्रासदी को हमारा प्रशासन, अधिकारी व नेता भूल गए हैं और अब शायद बड़ी त्रासदी लाने को तैयार हैं।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जिला कांगड़ा भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन-6 में आ गया है। इसका मतलब यह है कि हम भूकंप की दृष्टि से एक कदम और आगे बढ़ गए हैं। विकास के नाम पर फोरलेन निर्माण से जैसा तांडव जिला कांगड़ा में देखने को मिल रहा है, ऐसा पहले पूरे प्रदेश में देखने को नहीं मिला। टनल बन रही है। इसकी सारी मिट्टी सुरक्षित स्थान की जगह खड्डों के पानी में मिलाई जा रही है।
नाथू राम ने कहा कि धर्मशाला-शिमला व मंडी-पठानकोट फोरलेन निर्माण का कार्य तो किया जा रहा है, लेकिन इस दौरान नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। उन्होंने संबंधित निर्माण कंपनी के अधिकारियों को चेताया कि अधिकारी निर्माण कार्य को लेकर डंपिग साइट पर ही मलबा फैंकने का काम करें ना कि खड्डों के आसपास डंपिंग कज जाए। उन्होंने कहा कि मंडी जिला में साल 2023, 2024, 2025 में बड़ी त्रासदी सामने आई तो क्या यहां भी ऐसी त्रासदी लाना चाहते हैं।
उन्होंने जिला के सभी एसडीएम व तहसीलदार अधिकारियों से अपील की है कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जिला कांगड़ा में आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
