नई दिल्ली, 07 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में दिल्ली, उप्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में फैले गिरोह के सात आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 48 किलो प्रतिबंधित नशीली और साइकोट्रॉपिक दवाएं बरामद की हैं। जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त संजीव यादव ने शनिवार को बताया कि यह नेटवर्क स्थानीय स्तर पर नशा बेचने वालों से लेकर अंतरराज्यीय तस्कर तक फैला हुआ था।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार इस मामले की जांच सितंबर 2025 में शुरू हुई थी। सब-इंस्पेक्टर विकास दीप को अवैध रूप से बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक पदार्थ की आवाजाही की गोपनीय सूचना मिली थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम को सक्रिय किया गया। निगरानी के बाद लाजपत नगर इलाके से अनिरुद्ध राय नामक संदिग्ध को पकड़ा गया, जिसके पास से करीब दो किलो ट्रामाडोल पाउडर बरामद हुआ। जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह है, जो कई राज्यों में सक्रिय है। पुलिस टीम ने लगातार छापेमारी कर गिरोह की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर यूपी से मनोज नामक आरोपित को गिरफ्तार किया गया, जो अवैध रूप से साइकोट्रॉपिक दवाओं की सप्लाई कर रहा था। उसके खुलासे पर दिल्ली से किशन पाल उर्फ भुल्लर को पकड़ा गया, जिसके घर से 503 ग्राम अल्प्राजोलम बरामद हुआ।

पूछताछ के दौरान किशन पाल और उसके सप्लायर कृष्ण तनवार के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि हुई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कृष्ण तनवार को चांदनी चौक के पास से गिरफ्तार किया। उसी दिन आगे की जांच में सिंघु बॉर्डर के पास एक कार को रोका गया। तेज रफ्तार पीछा करने के बाद कार को नरेला इलाके में रोका गया, जिसमें 5.012 किलो ट्रामाडोल बरामद हुआ। कार चला रहा आरोपित मनोज कुमार हरियाणा के भिवानी का रहने वाला है।
हिमाचल और उत्तराखंड तक फैला नेटवर्क
इसके बाद पुलिस टीम ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छापेमारी की। यहां से प्रशांत और अमित नामक आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में कच्चा पाउडर और अन्य साइकोट्रॉपिक दवाएं बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार इन दवाओं को पैक कर खुदरा बाजार में बेचा जाता था, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार किया जा रहा था।
ऐसे करता था गिरोह काम
जांच में सामने आया है कि गिरोह साइकोट्रॉपिक दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बड़ी मात्रा में खरीदता था। इसके बाद इसे अवैध रूप से पैक कर बिना डॉक्टर की पर्ची के बाजार में बेचा जाता था। आरोपित फार्मा कंपनियों और मेडिकल दुकानों में काम करने के अनुभव का फायदा उठाकर कानून से बचते रहे। पुलिस उपायुक्त ने आगे बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में से कई पहले भी ड्रग्स के मामलों में शामिल रहे हैं। कुछ आरोपित फार्मा कंपनियों और मेडिकल दुकानों में काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें नशीली दवाओं की सप्लाई चेन की पूरी जानकारी थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी
